MP में 5 महीने में बदले जर्जर स्कूलों के आंकड़े, कमलनाथ ने सरकार को घेरा

पांच महीने के अंतराल में सरकारी रिकॉर्ड और विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर कांग्रेस हमलावर है। विपक्ष ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए स्कूलों की स्थिति से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता की मांग की है।
Kamal Nath

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों की स्थिति सुधारने की बजाय सरकार आंकड़ों की बाजीगरी कर अपनी अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जर्जर भवनों को कागजों में सही बताकर सरकार बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने मांग की कि स्कूल भवनों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर उनका तत्काल सुधार कराया जाए ताकि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

कांग्रेस ने स्कूलों की स्थिति पर किए सवाल

कमलनाथ ने कहा है कि फरवरी 2026 में सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि प्रदेश के 5,735 सरकारी स्कूल भवन जर्जर हैं। इसके बावजूद जुलाई 2026 में सरकार ने दावा किया कि प्रदेश में एक भी सरकारी स्कूल भवन जर्जर नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि महज पांच महीने में ऐसा क्या बदलाव हुआ कि हजारों जर्जर भवनों की स्थिति अचानक ठीक घोषित कर दी गई। उन्होंने जर्जर भवनों की समस्या का तत्काल समाधान करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उन्होंने मांग की है कि आंकड़ों के जरिए स्थिति को बेहतर दिखाने की बजाय स्कूलों की वास्तविक हालत सुधारने पर ध्यान दिया जाए।

पांच महीने में बदले आंकड़े

विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026-27 में 840 स्कूलों के नए भवनों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में 230 भवनों की मरम्मत और विभिन्न स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण को भी मंजूरी दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य शिक्षा केंद्र के रिकॉर्ड में अब भी 5,770 स्कूलों में नए भवन, बड़ी मरम्मत या शौचालय निर्माण की जरूरत दर्ज है। यह संख्या फरवरी में बताए गए जर्जर स्कूलों के आंकड़े से 35 अधिक है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में सीहोर और बैतूल सहित विभिन्न जिलों के स्कूलों की बदहाल स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। कई स्कूलों की छतों और फर्श में दरारें, दीवारों में सीलन तथा बारिश के दौरान छत से पानी टपकने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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