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हमीदिया अस्पताल मे ईलाज के लिये भर्ती मरीजों से ठगी, आरोपी इंदौर से गिरफ्तार

Written by:Sushma Bhardwaj
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मामलें में स्टाफ की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल भर्ती मरीजों की जानकारी ठग तक वार्ड से ही दी जाती थी, स्टाफ का कोई सदस्य मरीजों की मेडिकल कंडीशन से जुड़ी जानकारी ठग को उपलब्ध कराता था।
हमीदिया अस्पताल मे ईलाज के लिये भर्ती मरीजों से ठगी, आरोपी इंदौर से गिरफ्तार

Bhopal Police arrested FRAUD Man

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ ठगी का मामला सामने आया है। हैरान करने वाले इस मामलें में ठग ने खुद को डाक्टर बताया और अस्पताल के वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों के परिजनों से हजारों रुपये ऐंठे। आरोपी जितेन्द्र खागरे ने बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन का झांसा देकर रकम की डिमांड की। क्यूआर कोड भेजकर पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया। पुलिस ने आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी बैतूल कर रहने वाला है।

आरोपी जितेन्द्र खागरे

45 दिन में बनाया 10 मरीजों को निशाना 

बैतूल के रहने वाले जितेंद्र ने हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को ही ठग लिया आरोपी पिछले 45 दिन मे 10 पेशेंट को शिकार बना चुका है। उसने हर एक परिवार से 7 से 10 हजार रुपए तक की वसूली की। वह मरीजों और उनके परिजन को फोन कर कहता था कि यदि बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन चाहते हैं तो तय रकम तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर करनी होगी। भरोसे में आकर कई लोगों ने रकम ट्रांसफर कर दी, जिसके बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया।

ऐसे ठगा लोगों को 

हमीदिया अस्पताल शहर ही नही प्रदेश का काफी पुराना तथा नाम अस्पताल है, पिछले कुछ दिनो से अस्पताल के पोर्टल पर लगातार ईलाज के लिये भर्ती प्रसुताओ के परिजनो से डाक्टर द्वारा 5000-5000 रूपये लेने की शिकायत प्राप्त हो रही थी, इस शिकायत अस्पताल प्रंबधन द्वारा जाँच हेतु थाने पर भेजी गई थी, 6 फरवरी को आवेदक नितेश विश्वकर्मा ने थाना उपस्थित आकर अपनी पत्नि के ईलाज के लिये हमीदिया अस्पताल के भर्ती होने तथा अज्ञात व्यक्ति द्वारा डाक्टर बनकर आपरेशन के नाम पर प्रार्थी से पैसो की मांग कर 5000/- रूपये लेने की शिकायत किया जिसपर थाना कोहेफिजा मे अपराध क्रमाक 66/2026 धारा 318(4),319(2) बीएनएस का पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना मे लिया गया है।

अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत 

मामलें में स्टाफ की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल भर्ती मरीजों की जानकारी ठग तक वार्ड से ही दी जाती थी, स्टाफ का कोई सदस्य मरीजों की मेडिकल कंडीशन से जुड़ी जानकारी ठग को उपलब्ध कराता था। इसी जानकारी के आधार पर आरोपी फोन करता था, जिससे परिजन झांसे में आ जाते थे।  ठगी का शिकार बने पीड़ित ने अस्पताल अधीक्षक से इसकी शिकायत की और फिर इसके बाद मामले का खुलासा हुआ, आरोपी को रणनीति बनाकर पुलिस ने इंदौर से पकड़ा।

पुलिस कर रही पूछताछ 

आरोपी की सीडीआर तथा टावर लोकेशन का अवलोकन करने पर आरोपी के उज्जैन, इन्दौर, तथा देवास तथा अन्य शहरो के सरकारी अस्पताल के आसपास की लोकेशन मिली है, आशंका है कि आरोपी ने इन स्थानों पर भी ऐसी घटनाओ को अंजाम दिया है। आरोपी से अन्य अस्पताल मे की गई घटनाओं के सबंध मे जानकारी एकत्र की जा रही है। आरोपी के अन्य साथियो के सबंध मे आरोपी से पूछताछ जारी है अन्य घटनाओ के भी खुलासे की सम्भावना है।

पुलिस जांच में जल्द बड़े खुलासे

फिलहाल इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर दिए है, कि आखिर इतनी सिक्योरिटी के बाद भी ठग कैसे वार्ड तक पहुंच गया और उसे जानकारी किसने उप्लब्ध करवाई। वही अस्पताल प्रबंधन इस मामलें में भले ही खुद को निर्दोष बता रहा हो लेकिन पुलिस जांच में जल्द बड़े खुलासे हो सकते है।