अब हफ्ते में पांच दिन खुलेगा भोपाल, शनिवार और रविवार रहेगा ‘बंद’

अब हफ्ते में पांच दिन खुलेगा भोपाल, शनिवार और रविवार रहेगा ‘बंद’

भोपाल| इंदौर (Indore) के बाद अब राजधानी भोपाल (Bhopal) में कोरोना (Corona) बेकाबू हो रहा है| यहाँ लगातार बड़ी संख्या में नए केस सामने आ रहे हैं| गुरूवार को 85 नए पॉजिटिव मिले हैं, इन्हे मिलकर भोपाल में संक्रमितों का आंकड़ा 2 हजार के पार हो चुका है| बढ़ते मामलों को लेकर सरकार का फोकस अब भोपाल पर है| जिसके चलते सरकार ने फैसला किया है कि अब हफ्ते में दो दिन भोपाल बंद रहेगा|

अब सप्ताह में सिर्फ 5 दिन भोपाल खुलेगा, जबकि शनिवार और रविवार को शहर बंद रहेगा| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने मंत्रालय में भोपाल में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र (Narottam Mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना समीक्षा बैठक में सरकार ने फैसला लिया है कि हफ्ते में दो दिन शनिवार और रविवार को भोपाल बंद रहेगा| कोरोना के लगातार बढ़ते केस के कारण यह फैसला लिया गया है|

मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक प्रदेश में कोरोना काबू में है, इसलिए रिकवरी रेट मप्र का लगातार बढ़ रहा है, वही डबलिंग रेट भी देश के औसत से ज्यादा है, ग्रोथ रेट देश के औसत से कम है,| उन्होंने बताया कि आज भोपाल की समीक्षा के दौरान सीएम ने जेपी हॉस्पिटल में लापरवाही बरतने वाले एक डॉक्टर पर कार्यवाही के निर्देश भी दिए है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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