अशोकनगर जिले के महोली गांव में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि महोली गांव से वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले में लोधी समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं और समाज के सम्मान व अधिकारों की लड़ाई में हर कदम पर साथ रहेंगे। उन्होंने मांग की कि प्रतिमा हटाने के निर्णय की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और इसमें शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
क्या है पूरा मामला
महोली गांव में प्रशासन द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाए जाने के बाद ग्रामीणों और लोधी समाज के लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रानी अवंतीबाई लोधी उनके लिए सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि गौरव, स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक हैं। इसलिए प्रतिमा हटाए जाने को समाज ने गंभीरता से लिया है। वहीं, प्रशासन की ओर से बताया गया कि प्रतिमा अवैध रूप से स्थापित किए जाने के कारण हटाने की कार्रवाई की गई। हालांकि, प्रदर्शनकारी प्रशासन के इस तर्क से सहमत नहीं हैं और प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इस मामले पर मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रशासन का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई लोधी गौरव और स्वाभिमान की प्रतीक हैं, इसलिए उनकी प्रतिमा को उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिमा हटाने के निर्णय की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास और वीरांगनाओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






