न्याय सुनिश्चित करने और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए भोपाल में राजस्व प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। दरअसल राजधानी के रासलाखेड़ी स्थित आरआरबी रीगल प्रोजेक्ट, शुभ बिजनेस जोन के संचालक एवं बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित के विरुद्ध जिला राजस्व प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों को कुर्क कर सील कर दिया है। यह कदम उन निवेशकों के लिए राहत लेकर आया है, जो अपनी मेहनत की कमाई गंवाने के डर से परेशान थे और लंबे समय से पजेशन का इंतजार कर रहे थे।
दरअसल बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर खरीदारों से दुकान एवं व्यावसायिक संपत्तियों के नाम पर करोड़ों रुपये लेने के बावजूद समय पर कब्जा (पजेशन) न देने का आरोप है। पीड़ित पक्ष द्वारा इस मामले में मध्यप्रदेश संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में ही राजस्व प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।
इन दुकानों को किया गया कुर्क
वहीं यह कार्रवाई नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट वृत्त-गोविंदपुरा के आदेश पर पूरी हुई। पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राउंड फ्लोर की दुकान क्रमांक 3, 4, 5, 16, 17 तथा प्रथम तल की दुकान क्रमांक 43, 44 एवं 45 को कुर्क कर सील किया गया। दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई रेरा के प्रकरण क्रमांक एनबीपीएल-25-0118 में पारित आदेश के पालन में की गई है। राजस्व अमले, पटवारी और पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में यह कुर्की संपन्न हुई, जिसके लिए नायब तहसीलदार न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त सुरक्षा एवं गुप्तवार्ता, नगर पुलिस भोपाल से पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

बार-बार संपर्क करने के बावजूद बिल्डर ने केवल आश्वासन दिया
दरअसल एक पीड़ित महिला खरीदार ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उसने दुकान के लिए पूरी राशि का भुगतान कर रजिस्ट्री भी करा ली थी, लेकिन बिल्डर द्वारा उसे लंबे समय से पजेशन नहीं दिया गया। महिला का आरोप है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद बिल्डर केवल आश्वासन देते रहे। अंततः न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही उसे राहत मिली है, जो यह दर्शाता है कि कानून का पालन कितना जरूरी है।
वहीं स्थानीय खरीदारों का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट में कई लोगों से दुकानों और व्यावसायिक इकाइयों के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि वसूली गई, लेकिन उन्हें निर्धारित समयावधि में निर्माण और कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे अनेक निवेशक आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति निवेशकों के लिए बेहद चिंताजनक रही है।
दरअसल राजस्व प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है। मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी। इस कार्रवाई के बाद प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य निवेशकों और खरीदारों में भी उम्मीद जगी है कि उनकी शिकायतों पर भी उचित कार्रवाई हो सकेगी और उन्हें भी न्याय मिल पाएगा।






