भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 को लेकर किसानों के साथ व्यापारियों ने भी आपत्तियां जताई हैं। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान शाहपुरा स्थित टीएनसीपी कार्यालय पहुंचे और उपसंचालक हरिओम महेश्वरी को अपनी आपत्तियां सौंपीं। किसानों ने कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव, बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में निर्माण और बैठकों में सरपंचों को नहीं बुलाये जाने पर भी सवाल उठाये हैं।
किसानों का मुख्य विरोध 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में बदलने के प्रस्ताव को लेकर है। किसानों का कहना है कि इससे उनकी निजी जमीन, खेती और आजीविका संकट में पड़ जाएगी। वहीं, जनपद पंचायत अध्यक्ष फंदा प्रमोद सिंह राजपूत ने अधिकारियों पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया और मास्टर प्लान के खिलाफ रहने की बात कही। इसके साथ ही, किसानों ने चेतावनी देते हुये कहा कि अगर समय रहते मांगें नहीं मानी गईं तो किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आएंगे और टीएनसीपी दफ्तर के सामने धरने पर बैठ जाएंगे।
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मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिये किसानों से पहले व्यापारी शाहपुरा स्थित टीएनसीपी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग, एफएआर, कन्वर्जन फीस और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर आपत्तियां जताईं। उन्होंने मांग की कि कन्वर्जन फीस एकमुश्त और कुल 5 प्रतिशत निर्धारित की जाये। साथ ही शुल्क जमा करने पर पूरा कमर्शियल एफएआर दिया जाए और पुराने बाजारों में लंबे समय से कारोबार कर रहे व्यापारियों को राहत मिले।
व्यापारी महासंघ की प्रमुख मांगें
- रेट ऑफ़ कन्वर्शन (मिनिमम फीस) तय करना होगा और ये भी निश्चित करना होगा की फीस एक मुश्त हो (वन टाइम ) कोई एनुअल या रिकरिंग फीस ना हो टोटल फीस 5% हो।
- फीस जमा करने के बाद FAR फूली कमर्शियल दिया जाये।
- प्रारूप भोपाल विकास योजना 2047 के प्रस्तावित आराजी -3 भू उपयोग वर्गीकरण में अरेरा कॉलोनी को पृथक किया जाकर आरजी-1 श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाये।
- जो व्यापारी कई वर्षों से। 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर व्यापार कर रहे है वह उसी स्थान पर अपना व्यापार कर सके इसके लिए उस स्थान को मार्केट स्ट्रीट घोषित किया जाये।
- नगर निगम द्वारा जो सीलिंग की कार्यवाही के नोटिस दिए जा रहे हैं वह बंद किए जाए एवं भविष्य में मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आने के बाद कहीं पर भी सीलिंग की कार्रवाई नहीं की जाये।
- मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से जो जो परमिशन दी जा रही है वह परमिशन खाली पड़े खाली प्लाटों पर भी लागू हो जिससे कि भविष्य में वह कमर्शियल परमिशन लेने जाएं तो उनको भी परमिशन दी जाये।
- मास्टर प्लान 2047 का फाइनल ड्राफ्ट लागू करते समय भोपाल व्यापारी महासंघ के प्रतिनिधियों को भी उसे कमेटी में रखा जाये।
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के विरोध में सड़क पर उतरे किसान
गौरतलब है कि भोपाल मास्टर प्लान-2047 को लेकर किसानों, ग्रामीणों एवं व्यापारियों का विरोध बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को भी योजना के नये ड्राफ्ट में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किये जाने के विरोध में 66 गांवों के किसान और स्थानीय रहवासी सड़कों पर उतर आये थे। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित मास्टर प्लान में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किया जा रहा है। इससे हजारों किसानों की खेती और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों ने कहा कि वे अपनी आपत्तियां और सुझाव संबंधित विभाग तक पहुंचाने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि भूमि का उपयोग बदलने से उनके परिवारों के सामने रोजगार और भरण-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है।
