
Jitu Patwari
रीवा में परमाणु बिजली परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के मामले में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया है कि आदिवासियों को अपने जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आखिर कब तक जान गंवानी पड़ेगी। उन्होंने सरकार से आदिवासी समुदाय के हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों की आवाज को दबाया जा रहा है और उनकी सहमति, सुरक्षा तथा अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की सहमति और अधिकारों को दरकिनार कर उन पर कोई परियोजना नहीं थोपी जा सकती है।
जल सत्याग्रह के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
रीवा में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इसी विरोध के तहत विमला कोल भी अन्य ग्रामीणों के साथ जल सत्याग्रह कर रही थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई दिनों तक पानी में रहने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है।
कांग्रेस ने उठाए आदिवासी अधिकारों पर सवाल
विमला कोल की मौत को लेकर जीतू पटवारी ने सरकार की विकास नीति और आदिवासी हितों के प्रति उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में आदिवासी समुदाय की सहमति और अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में प्रभावित लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर कब तक आदिवासियों को अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। जीतू पटवारी ने मांग की है कि प्रभावित समुदाय की सहमति, सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए और विकास के नाम पर उनकी आवाज को अनसुना न किया जाए।
मुख्यमंत्री जी,
आदिवासियों को अपने जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आखिर कब तक जान गंवानी पड़ेगी?विकास के नाम पर आदिवासियों की आवाज़ कुचलना बंद कीजिए! उनकी सहमति, सुरक्षा और अधिकारों को दरकिनार कर उन पर कोई परियोजना नहीं थोपी जा सकती।
आदिवासियों की जान से बढ़कर कोई… pic.twitter.com/EXgs6EDKzf
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 23, 2026

