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भोपाल मेट्रो को लेकर खड़ा हुआ एक और विवाद! कब्रों के नीचे से गुजरने को लेकर वक्फ बोर्ड की कमेटी ने जताई आपत्ति, जानिए पूरा मामला?

Written by:Ankita Chourdia
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राजधानी भोपाल की मेट्रो परियोजना अब एक बड़े कानूनी और धार्मिक विवाद में उलझ गई है, जहां ऐतिहासिक कब्रिस्तान और वक्फ की जमीन पर निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चलिए जानते हैं यह पूरा मामला क्या है?
भोपाल मेट्रो को लेकर खड़ा हुआ एक और विवाद! कब्रों के नीचे से गुजरने को लेकर वक्फ बोर्ड की कमेटी ने जताई आपत्ति, जानिए पूरा मामला?

भोपाल की मेट्रो रेल परियोजना, जो शहर के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है, अब एक गंभीर कानूनी और धार्मिक दुविधा में फंस गई है। राजधानी में मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण को लेकर प्राचीन कब्रिस्तानों और वक्फ संपत्तियों पर विवाद गहराता जा रहा है। मामला अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है, जहां वक्फ बोर्ड की कमेटी ने मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में दो अलग-अलग प्रकरण दायर कर मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

दरअसल यह सारा विवाद भोपाल टॉकीज स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य से जुड़ा है। कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने इन दोनों ही मामलों में अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान कमेटी की ओर से इन संवेदनशील मामलों की पैरवी कर रहे हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला?

पहले प्रकरण में, हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना पर कड़ा विरोध जताया गया है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह कब्रिस्तान न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये शहर के सबसे पुराने और विशाल कब्रिस्तानों में से एक हैं, जहां हजारों की संख्या में कब्रें मौजूद हैं। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन से लगभग एक एकड़ क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है, जिससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और उनकी संरचना पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। यह आशंकाएं तब और बढ़ जाती हैं जब मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, कोई तकनीकी रिपोर्ट या सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है।

दलील में कही यह बात

अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि कब्रिस्तान की मूल प्रकृति को किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि भले ही मेट्रो लाइन को भूमिगत बताया जा रहा हो, लेकिन कब्रिस्तान के नीचे की जाने वाली खुदाई, सुरंग निर्माण और उससे उत्पन्न होने वाले कंपन से वहां मौजूद कब्रों और धार्मिक ढांचों को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित योजना पर अमल होता है, तो हजारों कब्रें प्रभावित होंगी, जिससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होंगी बल्कि यह एक अत्यंत संवेदनशील सामाजिक मुद्दा भी बन सकता है।

वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा एक मामला

दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है, जहां मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार, खसरा नंबर 88 की लगभग 11.93 हेक्टेयर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में विधिवत दर्ज है, जिसका पंजीयन वक्फ रजिस्टर में मौजूद है और राजपत्र में भी प्रकाशित किया जा चुका है। कमेटी का दावा है कि इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा उनके प्रबंधन और नियंत्रण में है, बावजूद इसके मेट्रो कंपनी ने बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि करीब 1.40 एकड़ वक्फ भूमि पर बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मौके पर भारी मशीनरी लगाकर सरिया डाला जा रहा है और बड़े पैमाने पर मिट्टी व निर्माण सामग्री का मलबा जमा किया गया है। कमेटी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई न केवल वक्फ संपत्ति पर सरासर अतिक्रमण है, बल्कि इससे भूमि की मूल स्थिति को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

अधिवक्ता अंसार उल हक ने बताया कि वक्फ अधिनियम के तहत किसी भी वक्फ संपत्ति का उपयोग या अधिग्रहण करने से पहले एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें वक्फ बोर्ड को नोटिस देना और उसकी अनुमति लेना शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह अवैध और कानून के विरुद्ध है। वक्फ अधिकरण से मांग की गई है कि विवादित स्थलों पर मेट्रो निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए, अवैध निर्माण को हटाया जाए और वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं।

Ankita Chourdia
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