सरकार पर पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए ओबीसी महासभा ने 20 जुलाई को विधानसभा घेराव का आह्वान किया है। मानसून सत्र के पहले दिन ही संगठन 27 प्रतिशत आरक्षण और 13 प्रतिशत पद होल्ड के मामले को लेकर सरकार पर निर्णायक दबाव बनाने की तैयारी में है। यह बड़ा ऐलान ओबीसी महासभा द्वारा राजधानी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया, जहां संगठन ने सरकार की मंशा और पिछड़ों के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल उठाए।
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने इस दौरान सरकार पर सीधे और तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश सरकार की मानसिकता अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है। पिछड़ों को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिल रहा है और सरकार लगातार उनके मौलिक तथा संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। कुशवाहा ने यह भी बताया कि वर्ष 2019 से ही सरकार ने जानबूझकर इस अत्यंत संवेदनशील मामले को लटका कर रखा है, जिसके चलते पिछड़ा वर्ग लगातार अपने हक से वंचित हो रहा है और उसमें भारी निराशा व्याप्त है। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पिछड़ों के प्रति एक सोची-समझी उपेक्षा है।
धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपने बयान में आगे कहा कि केवल आरक्षण का मामला ही नहीं, बल्कि पद भर्ती मामलों से लेकर अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकारी योजनाओं में भी पिछड़ों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सरकार की नीतियां और प्रशासनिक निर्णय पिछड़ों के हितों के खिलाफ जा रहे हैं, जिससे उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछड़ों को मुख्यधारा से दूर धकेल रही है, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसी व्यापक आक्रोश को स्वर देने और सरकार को उसकी जिम्मेदारियों का ठोस अहसास कराने के लिए यह विधानसभा घेराव का निर्णय लिया गया है।
रोशनपुरा चौराहे पर दोपहर 12 बजे होगी विशाल जनसभा
इस महत्वपूर्ण आंदोलन में प्रदेश भर से पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी, विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े समाज सेवी कार्यकर्ता और प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में जुटेंगे। ओबीसी महासभा का दावा है कि इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या में लोग शामिल होंगे, जो अपनी जायज मांगों को लेकर राजधानी की सड़कों पर उतरेंगे और सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे। सभी प्रदर्शनकारी दोपहर 12 बजे रोशनपुरा चौराहे पर एकत्रित होंगे। रोशनपुरा चौराहे पर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जहां ओबीसी महासभा समेत अन्य घटक दलों के पदाधिकारी भी शामिल होंगे और आंदोलन की रणनीति तथा अपनी मांगों को लेकर विस्तृत संबोधन देंगे।
जनसभा के बाद विधानसभा की ओर कूच
सभा के बाद सभी लोग एकजुट होकर विधानसभा की ओर कूच करेंगे, जिसका उद्देश्य सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना है। विधानसभा घेराव के जरिए ओबीसी महासभा अपनी लंबित मांगों, विशेषकर 27 प्रतिशत आरक्षण और 13 प्रतिशत होल्ड पदों के मुद्दे को लेकर सरकार पर सीधा और प्रभावी दबाव बनाएगी। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी ये मांगें पूरी नहीं होतीं और पिछड़ों को उनका पूरा हक नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष अनवरत जारी रहेगा। 27 प्रतिशत आरक्षण और 13 प्रतिशत होल्ड पदों का मुद्दा प्रदेश में अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विषय बन चुका है, जिस पर सरकार को जल्द से जल्द कोई ठोस और न्यायसंगत निर्णय लेना होगा।
कुशवाहा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से पिछड़ा वर्ग अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है और उनकी अनदेखी कर रही है। यह आंदोलन सरकार को स्पष्ट संदेश देने के लिए है कि पिछड़ा वर्ग अब अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा और हर स्तर पर आवाज उठाएगा। 20 जुलाई को शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही इस बड़े प्रदर्शन का आयोजन सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती साबित होगा। ओबीसी महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और अधिक तेज और व्यापक किया जाएगा। यह घेराव सिर्फ एक दिन का प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी दोहराया कि यह न्याय की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक पिछड़ों को उनका पूरा और सम्मानजनक हक नहीं मिल जाता।






