भोपाल से आई यह खबर सिर्फ एक नई मशीन की शुरुआत नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए राहत की सांस है जो अचानक ब्लड क्लॉट जैसी खतरनाक स्थिति का सामना करते हैं। अब तक जब भी शरीर में जटिल खून का थक्का बनता था, तो इलाज में देरी, बड़ी सर्जरी या बाहर रेफर होने जैसी परेशानियां सामने आती थीं। लेकिन अब राजधानी भोपाल में रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी तकनीक शुरू होने से हालात बदलने जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का यह पहला ऐसा केंद्र बन गया है जहां 24×7 एडवांस रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी मशीन उपलब्ध रहेगी। इसका मतलब है कि अब किसी भी समय जानलेवा ब्लड क्लॉट को बिना बड़ी सर्जरी और बिना मरीज को बेहोश किए हटाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक स्ट्रोक, डीप वेन थ्रोम्बोसिस और अन्य गंभीर स्थितियों में जीवन बचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी क्या है और कैसे काम करती है
रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसका इस्तेमाल शरीर में बने खतरनाक ब्लड क्लॉट को हटाने के लिए किया जाता है। जब खून का थक्का नसों या धमनियों में जम जाता है, तो वह रक्त प्रवाह को रोक देता है। इससे लकवा, दिल का दौरा या अंग खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
इस तकनीक में बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर एक पतली कैथेटर जैसी ट्यूब को छोटी सुई के जरिए नस के भीतर पहुंचाते हैं। मशीन हाई-प्रेशर सलाइन जेट की मदद से थक्के को तोड़कर बाहर निकाल देती है। पूरी प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है और मरीज को ज्यादा दर्द या लंबी रिकवरी की समस्या नहीं होती।
भोपाल में शुरू हुई रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी सुविधा इसलिए खास है क्योंकि पहले यह मशीन किराये पर मंगानी पड़ती थी। इसमें समय लगता था और कई बार मरीज की हालत गंभीर हो जाती थी। अब अस्पताल में खुद की मशीन होने से तुरंत इलाज संभव होगा।
भोपाल बना एमपी-छत्तीसगढ़ का पहला 24×7 केंद्र
भोपाल का यह अस्पताल अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा केंद्र बन गया है जहां रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी तकनीक 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा उन मरीजों को मिलेगा जिन्हें अचानक हाथ-पैर में सूजन, तेज दर्द या सुन्नता जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
डॉ. अगम्य सक्सेना अब तक 125 से अधिक सफल थ्रोम्बेक्टामी कर चुके हैं। उनके अनुभव के कारण यह सुविधा और भरोसेमंद बनती है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले जब मशीन किराये पर आती थी, तो समय की बर्बादी होती थी। अब 24×7 उपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों का तुरंत इलाज किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड क्लॉट के मामलों में समय सबसे अहम होता है। जितनी जल्दी थक्का हटेगा, उतना ही कम नुकसान होगा। ऐसे में भोपाल में रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
किन मरीजों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए लाभकारी है जिन्हें डीप वेन थ्रोम्बोसिस, पल्मोनरी एम्बोलिज्म या स्ट्रोक का खतरा होता है। कई बार लोग हाथ-पैर में अचानक सूजन या दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा बन सकती है।
डॉ. सर्वेश मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि अगर किसी को हाथ-पैर में अचानक सूजन, दर्द या सुन्नता महसूस हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी जैसे इलाज से लकवे या स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।
यह तकनीक बुजुर्ग मरीजों के लिए भी सुरक्षित मानी जा रही है, क्योंकि इसमें बड़ी सर्जरी या पूरी बेहोशी की जरूरत नहीं पड़ती। कम जोखिम और तेज रिकवरी इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
क्यों खास है यह एडवांस ब्लड क्लॉट रिमूवल तकनीक
पहले ब्लड क्लॉट हटाने के लिए या तो ओपन सर्जरी करनी पड़ती थी या लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। दवाओं से थक्का घुलने में समय लगता था और कई बार गंभीर साइड इफेक्ट भी सामने आते थे।
रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी में सीधे थक्के को निशाना बनाकर हटाया जाता है। इससे खून का प्रवाह तुरंत सामान्य हो जाता है। मरीज को अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और जल्दी घर वापसी हो जाती है।
भोपाल में इस तकनीक की शुरुआत से आसपास के जिलों और छत्तीसगढ़ के मरीजों को भी फायदा मिलेगा। अब उन्हें बड़े शहरों में रेफर होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय, पैसा और जोखिम तीनों कम होंगे।






