अगर आप भी बाहर खाना खाने के शौक़ीन है, अगर आपको भी बड़े-बड़े होटलों और रेस्टोरेंट पर आँख मूंदकर विश्वास है, तो यह ख़बर आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए। बुधवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने भोपाल के 3 बड़े होटलों और रेस्टोरेंट पर अचानक चेकिंग की। चेकिंग के दौरान ऐसी ऐसी चीज़ें सामने आयी है जिसे सुनकर शायद आप भी हैरान रह जाएंगे।
अक्सर लोग वीकेंड या फिर कभी भी विश्वास कर बड़े-बड़े होटलों में खाना खाने के लिए जाते हैं, बड़े होटलों का नाम होता है, इसलिए वहाँ का खाना लोगों को हमेशा कुछ ज़्यादा ही पसंद आता है, लेकिन इन स्वादिष्ट खाने के पीछे किचन का हाल शायद कोई नहीं जानता। जब 3 बड़े होटलों में अचानक दबिश दी गई, तो कई सारी खामियां सामने आयी।
‘द सेलेस्टियल पार्क’ का बुरा हाल
भोपाल के भोजपुर रोड पर बनी ‘द सेलेस्टियल पार्क’ होटल के किचन में जब टीम ने दबिश दी, तो वहाँ एक एरोमैटिक मिक्स सीजनिंग मसाला रखा मिला, जिसकी एक्सपायरी डेट पहले ही निकल चुकी थी। इसी मसाले का उपयोग ग्राहकों के खाने में किया जा रहा था, इसके अलावा किचन में चार डस्टबिन बिना ढक्कन के खुले पड़े हुए मिले। इतना ही नहीं जिस कढ़ाई में खाना बनाया जाता है वह बहुत ज़्यादा काली और गंदी हो चुकी थी। और सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि वहाँ लगभग 20 किलो सड़ी हुई प्याज़ भी मिली। हालाँकि वहाँ साफ़-सफ़ाई से जुड़ी कुछ चीज़ें ठीक थी, पर किचन में काम करने वाले 19 कर्मचारियों में से किसी का भी मेडिकल फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट नहीं मिला।

‘रंजीत रिजॉर्ट’ से सफाई गायब
होशंगाबाद रोड के ‘रंजीत रिजॉर्ट’ में भी हालात कुछ खास अच्छे नहीं थे। वहां के किचन का ड्रेनेज सिस्टम बिल्कुल खराब हालत में पड़ा था और बर्तन भी ढंग से साफ नहीं थे। डस्टबिन वहां भी खुले में रखे हुए थे। यहां तक कि वहां काम करने वाले किसी भी स्टाफ मेंबर के पास न तो FOSTAC ट्रेनिंग का कोई प्रूफ था और न ही उनकी मेडिकल चेकअप रिपोर्ट वहां मिली।

‘गुरु कृपा’ में घूम रहे थे कॉकरोच
बावड़ियाकलां के ‘गुरु कृपा फूड एंड कैटर्स’ की सच्चाई तो और भी परेशान करने वाली थी। वहां सफाई के नाम पर बस खानापूर्ति थी। कचरे से ऊपर तक भरे हुए 3 डस्टबिन ऐसे ही खुले पड़े थे। किचन के पास की टाइल्स टूटी हुई थीं और वहीं आस-पास 4 कॉकरोच मजे से घूमते हुए दिखे। सोचिए, वहां साफ किए हुए बर्तन भी गंदगी के बीच रखे थे और बचे हुए खाने को ठिकाने लगाने का कोई सिस्टम ही नहीं था।






