भोपाल: मध्यप्रदेश में पिछले कई दिनों से कांग्रेस राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को घेर रही है। अभी बालाघाट आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौत का मामला थमा नहीं था कि अब छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड से हुई 26 मासूमों की मौत के मामले से एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म होने लगा है। इस गंभीर मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में मासूमों की मौत का मुद्दा एक बार फिर उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर कर सीएम डॉ. मोहन यादव को निशाने पर लिया और मामले को लेकर सरकार से कई तीखे सवाल पूछे।

छिंदवाड़ा में मासूमों की मौत पर जीतू पटवारी का सरकार से सवाल

जीतू पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा में 26 मासूमों की जान चली गई लेकिन जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की गई थी उन्हें अब बहाल कर दिया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि क्या सरकार में बच्चों की मौत की जवाबदेही भी अस्थायी होती है? पीसीसी चीफ ने कहा कि 26 बच्चों की मौत को सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं थी। यह सिस्टम की गंभीर लापरवाही और निगरानी व्यवस्था की विफलता थी। ऐसे में जिम्मेदार अफसरों को दोबारा पद पर बहाल किए जाने को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।

अधिकारियों की बहाली पर फिर घिरी सरकार

पटवारी ने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित मंत्री को ही अधिकारियों की बहाली की जानकारी क्यों नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब मंत्री को अपने ही विभाग में हुए अहम फैसले की जानकारी नहीं है तो फिर इसकी जवाबदेही किसकी है? पटवारी ने कहा कि राज्य की जनता भी इस सवाल का जवाब चाहती है।

यदि कार्रवाई सच थी तो बहाली किसके दबाव में हुई?: जीतू पटवारी

जीतू पटवारी आगे सवाल किया कि मासूमों की मौत के बाद अधिकारियों का निलंबन वास्तव में कार्रवाई थी या सिर्फ दिखावा? यदि कार्रवाई सच थी तो बहाली किसके दबाव में हुई? जिम्मेदारी तय हुई या जिम्मेदारी से बचने का खेल हुआ? उन्होंने ने कहा कि बच्चों की जिंदगी से बड़ा कुछ भी नहीं हो सकता। न कोई पद, न कोई अधिकारी और न ही किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण बच्चों की जान से ऊपर हो सकता है।

उमंग सिंघार ने भी मामले में उठाए सवाल

वहीं, जीतू पटवारी के अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है और सरकार से सवाल पूछे हैं। ​उमंग सिंघार ने कहा कि छिंदवाड़ा में 26 मासूम बच्चों की मौत पर मोहन सरकार का यह कैसा न्याय है? कफ सिरप कांड के गुनहगारों को सजा देने के बजाय पूरी सरकार भ्रष्ट अफसरशाही की ढाल बनकर खड़ी हो गई है।

अफसरोंं की बहाली पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

सिंघार ने कहा कि STF और विभागीय जांच के बीच जॉइंट ड्रग कंट्रोलर टीना यादव ने आरोपी ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन को बहाल कर दिया। स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल खुद को बेबस बताते हुए कह रहे हैं कि शासन की सहमति के बिना बहाली हुई। अब तीसरे आरोपी डिप्टी ड्रग कंट्रोलर शोभित कोष्टा की भी बहाली की पटकथा लिखी जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि अगर मंत्री के नाक के नीचे से आरोपी अफ़सर बहाल हो रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और सरकार का संरक्षण है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या मोहन सरकार में भ्रष्टाचारियों का इतना रसूख है कि वे मासूमों की मौत के बाद भी कुर्सी पर बैठेंगे? 26 मासूमों के लहू का यह सौदा राज्य की जनता कभी माफ नहीं करेगी।