जनजातीय नायक टंट्या मामा के बलिदान दिवस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा को याद किया

टंट्या मामा को "भारतीय रॉबिनहुड" कहा जाता है। मुख्यमंत्री ने उनके 135वें बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने खंडवा जिले के इस जनजातीय नायक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके योगदान को सराहा। टंट्या मामा ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी।
CM Mohan Yadav Pays Tribute To Tantya Mama

CM Mohan Yadav Pays Tribute To Tantya Mama : आज टंट्या मामा का बलिदान दिवस है। उनके 135वें बलिदान दिवस पर सीएम डॉ मोहन यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘खंडवा जिले के पंधाना तहसील में जन्में टंट्या मामा भील जी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। हमारी सरकार बनने के बाद हमने खरगोन में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की है। हमने पाठ्यक्रम में भी उन्हें स्थान दिया है, जिससे भावी पीढ़ियां उनके आदर्श जीवन को जान सकें।’

टंट्या भील भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण योद्धा थे। क्रांतिकारी टंट्या मामा का जन्म 26 जनवरी 1842 को मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के पंधाना में हुआ था। वे भील जनजाति से ताल्लुक रखते थे। टंट्या मामा ने अंग्रेजों के खिलाफ स्थानीय लोगों का नेतृत्व किया। वे हमेशा आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने और अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे जुल्मों के खिलाफ लड़ते रहे।

आदिवासी समाज के नायक टंट्या मामा का बलिदान दिवस

हर साल 4 दिसंबर को टंट्या मामा का बलिदान दिवस मनाया जाता है। क्रांतिकारी टंट्या भील जनजातीय समुदाय में टंट्या मामा और “भारतीय रॉबिनहुड” के रूप में जाने जाते हैं। टंट्या मामा गरीब और शोषित आदिवासियों की मदद के लिए जाने जाते थे। वे अमीरों और ब्रिटिश हुकूमत के साथ जुड़े सामंतों से धन छीनकर जरूरतमंदों में बांटते थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष किया और समाज के गरीब एवं वंचित वर्गों की मदद की।

मुख्यमंत्री ने दी टंट्या मामा को श्रद्धांजलि

टंट्या मामा ने 15 साल तक ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और वे गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे। उनका मुख्य हथियार “दावा” या फलिया था। वे अपनी बंदूक और पारंपरिक तीरंदाजी के भी विशेषज्ञ थे। टंट्या मामा आदिवासी समाज में वे एक लोकनायक और प्रेरणा के स्रोत हैं। आज भी टंट्या मामा को आदिवासी समाज में एक महानायक के रूप में पूजा जाता है। मध्य प्रदेश में उनके नाम पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आज भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महान स्वतंत्रता सेनानी व जनजातीय नायक टंट्या मामा भील के बलिदान दिवस के अवसर पर उनके चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।

Virendra Sharma
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