विजयादशमी पर सीएम मोहन यादव इंदौर में करेंगे शस्त्र पूजन, MP के सभी 55 जिलों में होंगे कार्यक्रम

दशहरे पर प्रदेशभर की पुलिस लाइनों में शस्त्र पूजन होगा। मुख्यमंत्री इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे वहीं सभी मंत्री अलग-अलग जिलों में शस्त्र पूजन करेंगे।
MP CM Dr. Mohan Yadav

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विजयादशमी के अवसर पर इंदौर में शस्त्र पूजन करेंगे। मध्यप्रदेश में इस मौके पर प्रदेशव्यापी आयोजन किए जाएंगे। राज्य के 55 जिलों में से 31 जिलों में मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि शस्त्र पूजन कार्यक्रमों में शामिल होंगे जबकि शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की नवमी और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दशहरे पर समाज के साथ सरकार भी शस्त्र पूजन की परंपरा में सहभागी बनेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर की पुलिस लाइनों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मंत्री अलग-अलग स्थानों पर शस्त्र पूजन करेंगे।

ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष, मंदसौर में उपमुख्यमंत्री करेंगे पूजन

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में शस्त्र पूजन करेंगे जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दी गई है। शेष जिलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी आयोजन की अगुवाई करेंगे।

दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा

दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा भारतीय संस्कृति में शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा के संकल्प से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इसी कारण इस दिन शस्त्रों की पूजा कर शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के संकल्प को महत्व दिया जाता है।

प्राचीन समय में राजा और योद्धा विजयादशमी पर अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे। इस दिन को सैन्य तैयारियों और नए अभियान शुरू करने के लिए भी शुभ माना जाता था। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ में छिपाए थे। बाद में अर्जुन ने उन्हें प्राप्त किया। इसी कथा से दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा भी जोड़ी जाती है।

वर्तमान समय में भी कई स्थानों पर लोग पारंपरिक हथियारों और काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा करते हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए शस्त्र पूजन नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है। मध्यप्रदेश में पुलिस लाइनों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम इसी परंपरा का हिस्सा हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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