मध्यप्रदेश कांग्रेस ने वर्ष 2007 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान इंदौर के ग्राम कुमेड़ी की जमीन को निवेश परियोजना के नाम पर इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की योजना से मुक्त कराने के मामले में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने आरोप लगाया कि लगभग 490 करोड़ रुपये के निवेश और 4,000 लोगों को रोजगार देने के प्रस्ताव के बावजूद निर्धारित परियोजना पूरी नहीं हुई। कांग्रेस ने मामले की लोकायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मुकेश नायक ने कहा कि जेकेएम इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से निदेशक अभिषेक मोदी के माध्यम से किए गए निवेश समझौते में लगभग 280 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश और बिग मॉल के निर्माण का प्रस्ताव था। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित परियोजना के बजाय संबंधित जमीन पर होटल, आवासीय कॉलोनियों और अन्य भवनों का विकास किया गया। पार्टी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन के उपयोग और निवेश समझौते की शर्तों के पालन की जांच होनी चाहिए।
पत्राचार के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर किए सवाल
मुकेश नायक ने कहा कि संबंधित जमीन इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 151 में शामिल थी। परियोजना के लिए योजना में बदलाव कर जमीन उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। कांग्रेस ने जमीन के डायवर्शन, कॉलोनी विकास और बिक्री की वैधानिकता की जांच करने के साथ संभावित सरकारी राजस्व नुकसान का आकलन करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता ने ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा की ओर से इस मामले में 5 मई 2024 को पत्र क्रमांक 2044 और 26 जून २०२४ को पत्र क्रमांक 5592 जारी किए गए थे। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि संबंधित पत्राचार के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने इन्फोसिस को आवंटित लगभग 130 एकड़ जमीन वापस लिए जाने का उदाहरण देते हुए पूछा कि यदि निर्धारित उद्देश्य पूरा नहीं होने पर किसी परियोजना की जमीन वापस ली जा सकती है, तो कुमेड़ी के इस मामले में समान नियमों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मुकेश नायक ने राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम के दौरान इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से समय, व्यवस्थाओं और शुल्क को लेकर सख्ती बरते जाने का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक कार्यक्रम के मामले में सख्ती दिखाई गई, लेकिन जमीन से जुड़े इस प्रकरण में वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
दस्तावेजों की जांच की मांग
प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने पत्रकार वार्ता में दस्तावेजों के आधार पर मामले की जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि जमीन को योजना से मुक्त करने की प्रक्रिया में परियोजना की शर्तों के पालन को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों में वर्ष 2010 के विभागीय पत्राचार, वर्ष 2023 में जमीन के विकास और बिक्री से संबंधित गतिविधियों तथा वर्ष 2024 में जारी पत्रों का उल्लेख है।
राहुल राज ने सवाल किया कि यदि जमीन किसी विशेष परियोजना के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई थी तो उसके बाद व्यावसायिक उपयोग, डायवर्शन, कॉलोनी विकास और बिक्री की अनुमति किन नियमों के तहत दी गई। उन्होंने संबंधित विभागों और प्राधिकरण के बीच समन्वय की स्थिति की भी जांच करने की मांग की है।
कांग्रेस ने की चार प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने पूरे मामले की लोकायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने, वर्ष 2007 के समझौता ज्ञापन (एमओयू) और योजना क्रमांक 151 से 169-ए में बदलाव से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करने की मांग की है। इसके साथ ही जमीन के डायवर्शन, कॉलोनी विकास और बिक्री की वैधानिकता की जांच तथा संभावित राजस्व नुकसान का आकलन करने को कहा है।
पार्टी ने मांग की है कि अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। मुकेश नायक ने सरकार से निवेश समझौतों, वास्तविक निवेश, रोजगार सृजन और सरकारी राजस्व से संबंधित पूरा विवरण सार्वजनिक करने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस हाईकोर्ट में याचिका दायर करने सहित अन्य कानूनी विकल्प अपनाएगी।






