राहुल गांधी और नेहा बोरा की एकसाथ तस्वीर दिखाकर BJP का बड़ा हमला-“इनका उद्देश्य भारत में लोकतंत्र को तहस नहस करने की बड़ी साजिश”

प्रदीप भंडारी ने कहा नेहा बोरा के शब्द राहुल गांधी के विचारों को स्पष्ट करते हैं। अगर राहुल गांधी की मानसिकता अराजक नहीं है, तो वे एक घंटे के अंदर नेहा बोरा के खिलाफ बयान देकर दिखाएं।
Rahul Gandhi Neha Bora together BJP attack

Rahul Gandhi Neha Bora together BJP attack

वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर BJP ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाये हैं,  देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ इंडिया ब्लॉक की पार्टियाँ, उनके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी सहित वामपंथी छात्र संगठन AISA चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं, इस बीच पिछले दिनों राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान जो अलग तस्वीर दिखाई दी उसने देश की सियासत को अलग दिशा में मोड़ दिया है जिसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुल गांधी ने तीन दिन पहले देश में एक नई सियासी इबारत लिखी, उन्होंने SIR का विरोध करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक एक मार्च निकाला और चुनाव आयोग पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाये, मुख्य रूप से राहुल गांधी के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार थे। राहुल गांधी ने लाखों लोगों की भीड़ के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर याचिका दाखिल की और सुप्रीम कोर्ट सहित पूरे देश को अपनी ताकत का अहसास कराया।

राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च में उनके साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेसी नेता तो थे है लेकिन एक जो और चेहरा उनके साथ था वो था वामपंथी छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा का। कहने को कांग्रेस और आइसा की विचारधारा अलग अलग है लेकिन वोट चोरी के मुद्दे पर दोनों एक साथ हैं, मार्च के दौरान राहुल गांधी कभी नेहा बोरा को आगे करते दिखाई दिए, कहीं नेहा बोरा के कंधे पर हाथ लेकर उसका सहारा लेते दिखाई दिए। एक तस्वीर में राहुल गांधी का एक हाथ प्रियंका गांधी के कंधे पर है और दूसरा हाथ नेहा बोरा के कंधे पर है , ये तस्वीर सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है और वायरल भी है।

भारतीय जनता ने राहुल गांधी और नेहा बोरा के एक साथ होने पर तंज कसा है और निशाना भी साधा है, हालाँकि भाजपा की आपत्ति राहुल गांधी और नेहा बोरा की एक साथ वाली तस्वीर को लेकर नहीं है बल्कि नेहा बोरा के उस बयान को लेकर है जिसमें वो बांग्लादेश में हुए आंदोलन का समर्थन कर रही हैं और भारत को रास्ता दिखाने के लिए धन्यवाद देती दिखाई दे रही हैं।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा,  जनता पिछले कुछ दिनों से राहुल गांधी द्वारा Political Resistance (राजनीतिक प्रतिरोध) शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके पीछे का असली मकसद लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि अराजकता की आड़ में भारत के लोकतंत्र को तहस-नहस करना है।

नेहा बोरा के बांग्लादेश आंदोलन वाले बयान पर BJP ने कांग्रेस को घेरा  

भंडारी ने कहा राहुल गांधी ने नेहा बोरा को अपनी पोस्टर गर्ल बनाया था, जिसका अर्थ है कि राहुल गांधी के विचारों से नेहा बोरा के विचार मेल खाते हैं। जबकि नेहा बोरा ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित हैं और जैसा बांग्लादेश में हुआ, वैसा ही वे हिंदुस्तान में भी चाहती हैं।

राहुल गांधी का इको सिस्टम देश में अराजकता फैलाने की साजिश रच रहा 

उन्होंने कहा बांग्लादेश में समूहों और भीड़ के सहारे पूरी व्यवस्था को तहस-नहस करने का प्रयास किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘शासन परिवर्तन’ (regime change) था। इससे साबित होता है कि जब राहुल गांधी लोकतांत्रिक तरीके से अपने परिवार को सत्ता में नहीं ला पा रहे हैं, तो वे और उनका पूरा इको-सिस्टम देश में अराजकता फैलाने की साजिश रच रहा है।

इनका पैटर्न लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि अराजकता को वैध बनाना है 

भाजपा प्रवक्ता ने कहा प्रशांत भूषण ने कुछ दिन पहले एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खून-खराबे और क्रांति की बात की थी और ठीक 24 घंटे बाद राहुल गांधी ने उनके साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह एक पैटर्न को दर्शाता है कि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि अराजकता को वैध बनाना और भारतीय राज्य व लोकतंत्र के खिलाफ लड़ाई लड़ना है।

राहुल गांधी की अराजकता को देश ने स्पष्ट रूप से नकारा है

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा देश की जनता ने विभिन्न चुनावों (चाहे बैलेट हो या EVM, उपचुनाव हों या छात्र चुनाव) में भारी मतदान कर राहुल गांधी की इस अराजकता को स्पष्ट रूप से नकारा है और युवा भी इसका विरोध कर रहे हैं। असली लड़ाई राहुल गांधी और उनके इको-सिस्टम (जो भारत में बांग्लादेश जैसी अराजक स्थिति लाना चाहते हैं) बनाम भारत की जनता और लोकतंत्र के बीच है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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