मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा संचालित करने वाली यूनिवर्सिटी RGPV से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम हटाये जाने की चर्चा के बीच कांग्रेस ने इसपर कड़ी आपत्ति जताई है, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लेकर राज्य सरकार को घेरा है और गंभीर आरोप लगाये हैं
प्रदेश की मीडिया ने आज ये खबर दी कि प्रदेश सरकार राजीव गांधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय का नाम बदलने जा रही है और इसे तीन हिस्सों में बाँटने जा रही है, इसमें भोपाल इकाई का नाम मध्य भारत प्रोद्योगिकी विश्व विद्यालय, उज्जैन इकाई का नाम मालवा प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय और जबलपुर इकाई का नाम महाकौशल प्रोद्योगिकी विश्व विद्यालय होगा , खबर के मुताबिक सीएम डॉ मोहन यादव ने कल शुक्रवार प्राथमिकता वाली योजनाओं की समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, अब ये मंजूरी के लिए कैबिनेट में जायेगा ।
RGPV का नाम बदलने की चर्चा के बीच भड़की कांग्रेस
इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस भड़क गई है, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसपर रिएक्शन दिया है उन्होंने X पर लिखा- भाजपा इतिहास मिटाने की राजनीति कर सकती है, लेकिन देश राजीव गांधी के योगदान को कभी नहीं भूल सकता। जिन राजीव गांधी ने भारत में तकनीकी क्रांति की नींव रखी, जिस दूरदृष्टि ने कंप्यूटर, टेलीकॉम और आधुनिक शिक्षा के रास्ते भारत के युवाओं के लिए खोले, आज उन्हीं राजीव गांधी का नाम मिटाने में भाजपा सरकार अपनी पूरी ताकत लगा रही है।
भाजपा को राजीव गांधी से इतनी परेशानी क्यों है?
उमंग सिंघार ने कहा- भोपाल की आरजीपीवी यूनिवर्सिटी का नाम बदलना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि भाजपा की वही पुरानी राजनीति है, काम कम, नाम बदलो ज़्यादा। सवाल यह है कि आखिर भाजपा को राजीव गांधी से इतनी परेशानी क्यों है? क्या इसलिए कि देश के डिजिटल और तकनीकी भारत की बुनियाद कांग्रेस सरकारों ने रखी थी? क्या इसलिए कि आज जिस IT और टेक्नोलॉजी इंडिया पर भाजपा श्रेय लेने की कोशिश करती है, उसकी शुरुआत राजीव गांधी जी के विज़न से हुई थी?
नाम बदलने से न यूनिवर्सिटी बेहतर होगी, न युवाओं को नौकरी मिलेगी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- 22 साल से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है, शिक्षा व्यवस्था बदहाल, विश्वविद्यालय संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं… लेकिन सरकार का फोकस सिर्फ नाम बदलने पर है। नाम बदलने से न यूनिवर्सिटी बेहतर होगी, न युवाओं को नौकरी मिलेगी, न शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।






