शिवराज की घोषणा पर दिग्विजय का सवाल, आप पर कैसे भरोसा करें ..?

शिवराज की घोषणा पर दिग्विजय का सवाल, आप पर कैसे भरोसा करें ..?

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (By-election) से पहले शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने बड़ा फैसला किया है| मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि केवल मध्य प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलें, इसके लिए कानूनी कदम उठाएंगे। शिवराज ने एक वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी। कुछ दिनों पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इसको लेकर मांग की थी| अब दिग्विजय ने कहा है कि आखिर 15 साल तक किस बात का इन्तजार था|

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर सीएम शिवराज की घोषणा पर निशाना साधा है| उन्होंने लिखा – मेरी मॉंग शिवराज जी आपने स्वीकार की, धन्यवाद।लेकिन जब तक शासकीय आदेश नहीं निकलेगा तब तक आप पर कैसे भरोसा करें? १५ साल तक किस बात का इंतज़ार था? हज़ारों मध्यप्रदेश के होनहार नौजवानों का हक़ आपने मारा और व्यापम के भ्रष्टाचार के लिए कौन ज़िम्मेदार है? आप और केवल आप।

बड़ी देर से याद आये मप्र के छात्र: सिंघार
पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने ट्वीट कर लिखा-शिवराज जी मध्यप्रदेश के छात्रों की बड़ी देर से याद आई, आप के पूर्व कार्यकाल में नियम बदल कर व्यापम के जरिए में कई लोग भर्ती हुए, कुछ आपके ससुराल गोंदिया महाराष्ट्र के भी थे ,जब आपको क्यों नहीं याद आई, लेकिन 8 साल पहले इतने उपचुनाव नहीं थे’।

https://twitter.com/digvijaya_28/status/1295668606382911490

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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