संविधान दिवस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने देश की संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाए और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज यह आशंका गहरी होती जा रही है कि क्या भारत में संवैधानिक व्यवस्था उसी मजबूती से कायम रह पाएगी या नहीं, जैसी इसकी स्थापना के समय कल्पना की गई थी।
एएनआई से बात करते हुए उन्होंने आरोप है कि लोकतांत्रिक ढांचे की रीढ़ मानी जाने वाली संस्थाएं विशेषकर चुनाव आयोग, पक्षपाती तरीके से काम कर रही हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास कमजोर हो रहा है। इसी के साथ उन्होंने दो मांगें रखी है जिससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बनी रहे।
संविधान दिवस पर दिग्विजय सिंह ने संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि क्या इस देश में संवैधानिक व्यवस्था कायम रहेगी या नहीं रहेगी। लोकतंत्र रहेगा या नहीं रहेगा। क्या यहां संवैधानिक संस्थाएं मूल रूप से निष्पक्ष रूप से काम करेंगी या नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र के लिए चुनावों की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में मतदाता सूची से लेकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों तक कई स्तरों पर मैनिपुलेशन की आशंका बनी हुई है।
चुनाव आयोग से की ये मांग
उन्होंने कहा कि अनेक बार मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मिलता है। इसके निराकरण के लिए उन्होंने मांग की है कि वोटर-लिस्ट ऐसी तैयार की जाए जिसमें आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से दोहराव की तुरंत पहचान हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि कि मतदान के बाद मतदाताओं को रसीद दी जानी चाहिए, जिसे वे स्वयं अलग बैलेट बॉक्स में डाल सकें, ताकि मशीन और पेपर दोनों की क्रॉस-वेरिफिकेशन से चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी बने। उन्होंने कहा कि यदि काउंटिंग टेबल की संख्या बढ़ा दी जाए तो पूरी प्रक्रिया में समय भी अधिक नहीं लगेगा और लोकतंत्र की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी स्वतंत्र लोकतंत्र में निष्पक्षता का चुनाव अहम है और लोकतंत्र को बचाने के लिए ये निर्णय लिए जाने आवश्यक हैं।






