शिवराज के नाम पटवारी का ‘कटे कोने का खत’, ‘अब तो पिघलो, आंसू पोंछने आजाओ’

शिवराज के नाम पटवारी का ‘कटे कोने का खत’, ‘अब तो पिघलो, आंसू पोंछने आजाओ’

भोपाल| प्रदेश भर में कोरोना (Corona) का कहर देखने को मिल रहा है, खासकर मालवा (Malwa) क्षेत्र में हालात चिंताजनक बने हुए हैं| इंदौर (Indore) उज्जैन (Ujjain) समेत अन्य जिलों में जहां संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है| वहीं मौत का बढ़ता आंकड़ा भी डरा रहा है| इसको लेकर पूर्व मंत्री व कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कटे कोने की चिट्ठी (शोक पत्रिका) लिखी है| जिसमे उन्होंने मालवा क्षेत्र की स्थिति बताते हुए अब तक शिवराज के मालवा न आने पर निशाना साधा है|

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी इंदौर में कोरोना के बिगड़ते हालात को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज से इंदौर को हेड क्वार्टर बनाने समेत केंद्र सरकार से विशेष निगरानी की मांग कर चुके हैं| अब उन्होंने एक पत्र लिखकर शिवराज पर हमला बोला है|

अब तो पिघलो, आंसू पोछने आजाओ
पत्र में पटवारी ने लिखा-‘मेरे मालवा के जिले शिप्रा व नर्मदा का तट मानवता की लाश से आहत है आपके मानवीय व्यवहार में मानवीय व्यवहार की तलाश कर रहा है| है संवेदन शून्य प्रशासक क्या उन चीखों को सुनने के लिए उनके आंसू पोछने के लिए आपके पास समय नहीं है, आपके इंतजार में इस सूने मालवा की आंखें पथरा गई है, अब तो पिघलो, और इसके आंसुओं को पोंछने के लिए अब तो आ जाओ और नहीं तो हम जनप्रतिनिधि काली राई लेकर स्वयं आपको इस शोक में बुलाने के लिए उपस्थित होंगे’|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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