भोपाल में बिना मास्क के निकले तो होगी FIR

भोपाल में बिना मास्क के निकले तो होगी FIR

भोपाल| राजधानी भोपाल में कोरोना संक्रमितों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं| कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए राजधानी भोपाल में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है| गुरुवार को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी तरुण पिथोड़े ने आदेश जारी करते हुए बिना मास्क के घूमने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं|

इसके साथ ही उन्होंने दोपहिया वाहन पर एक और चार पहिया वाहन पर दो व्यक्तियों से अधिक बैठाने पर भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं| लॉक डाउनलोड और सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं करने पर कलेक्टर तरुण पिथोड़े सख्त हो गए हैं| कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने बताया कि शहर में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एहतियात के तौर पर कई कदम उठाए गए हैं, जिसका सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है|

कलेक्टर ने लॉकडाउन का सख्ती से पालन हो सके इसके लिए संबंधित अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को शहर में चिन्हित, संवेदनशील क्षेत्र और सभी चेक प्वॉइंट पर सख्ती से चेकिंग करने के आदेश दिए हैं| वहीं बेवजह घूमने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी| उन्होंने निर्देशों में स्पष्ट तौर पर कहा है कि शहर में कोरोना संक्रमण से आम लोगों के बचाव के लिए दैनिक वस्तुओं खाद्यान्न, दवाइयों और दूध आदि लेने-लाने के लिए छूट प्रदान की गई है. इसके अतिरिक्त बेवजह और फालतू घूमते हुए पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध शहर में लगाई गई धारा 144 अंतर्गत 188 के तहत वैधानिक कार्यवाही की जाएगी|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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