अतिथि विद्वान ने की आत्महत्या, भार्गव बोले-यही है सरकार की 1 साल की उपलब्धि

अतिथि विद्वान ने की आत्महत्या, भार्गव बोले-यही है सरकार की 1 साल की उपलब्धि

भोपाल।
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में अतिथि विद्वान संजय कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। संजय जिले के चंदिया में हो रहे अतिथि विद्वान आंदोलन में सक्रिय थे।वे काफी दिनों से परेशान चल रहे थे। उनकी मौत पर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने शोक जताया है। वही प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर जमकर निशाना साधा है।गोपाल ने लिखा है कि क्या कमलनाथ सरकार में इंसान की जान की कीमत नही। क्या एक साल में यही सरकार की उपलब्धि है। अतिथि विद्वान अवसाद और चिंता में आत्महत्या कर रहे है।

भार्गव ने ट्वीट कर लिखा है कि उमरिया जिले के चंदिया शासकीय महाविद्यालय में क्रीड़ा अधिकारी के पद पर कार्यरत अतिथिविद्वान श्री संजय कुमार जी के निधन का समाचार मिला। उनके निधन शोक व्यक्त करता हूँ। ईश्वर दिवंगत के परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति

भार्गव ने आगे लिखा है उमरिया चंदिया के संजय कुमार अतिथि विद्वान आंदोलन में सक्रिय थे। उनके साथियों से जानकारी मिली कि संजय कुमार अपने अनिश्चित भविष्य और आर्थिक तंगी का जिक्र अक्सर किया करते थे, वें काफी तनावग्रस्त थे। आज संजय ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी आत्महत्या हमे सोचने को मजबूर करती है।

आगे भार्गव ने लिखा है संजय जैसी परिस्थितियों से आज हजारों अतिथि विद्वान गुजर रहे है। कमलनाथ
जी क्या 1 साल में आपकी यही उपलब्धि है। अतिथि विद्वान अवसाद और चिंता में आत्महत्या कर रहे है। मुख्यमंत्री जी आप कितनी ओर मौत होने का इंतज़ार कर रहे है। क्या कांग्रेस सरकार के लिए इनकी जान की कोई कीमत नही?

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews