IAS संतोष वर्मा के बयान को राजेंद्र शुक्ला ने आपत्तिजनक बताया, बोले- ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का प्रतीक

सरकार ने IAS संतोष वर्मा को नोटिस दिया है, पूछा है क्यों ना आपके विरुद्ध  अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाये इसलिए इस नोटिस के मिलने से 7 दिन के अन्दर स्पष्टीकरण दें, ऐसा नहीं करने पर एकपक्षीय निर्णय लिया जायेगा।
Rajendra Shukla

IAS संतोष वर्मा के ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए बयान की हर तरफ आलोचना और निंदा हो रही है, अजाक्स ने उनके बयान को बहन बेटियों को अपमानित करने वाला बताया वहीं सरकार ने भी संतोष वर्मा को नोटिस थमाया है, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बयान को विकृत मानसिकता का प्रतीक बताया है, साथ ही कहा है कि बयान पर वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया है जो संतोषजनक नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

अपने बयान पर बुरी तरह घिर चुके आईएएस संतोष वर्मा को अजाक्स ने फर्जी पदाधिकारी बता दिया है, अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश मौर्य ने एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए स्पष्ट किया कि संतोष वर्मा नाम का कोई भी पदाधिकारी उनके संगठन में नहीं है, उन्होंने वर्मा की नियुक्ति को फर्जी बताया।

IAS वर्मा से सरकार ने 7 दिन में मांगा है स्पष्टीकरण 

इधर सरकार ने भी संतोष वर्मा को नोटिस थमा दिया है, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भेजे गए कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि आपका बयान प्रथम दृष्टया सामाजिक समरसता को ठेस पहुँचाने और आपसी वैमनस्यता पैदा करने वाला प्रतीत होता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों से अपेक्षित आचरण के अननुरूप नहीं होकर अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। तो बताये क्यों ना आपके विरुद्ध  अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाये इसलिए इस नोटिस के मिलने से 7 दिन के अन्दर स्पष्टीकरण दें, ऐसा नहीं करने पर एकपक्षीय निर्णय लिया जायेगा।

राजेंद्र शुक्ला ने टिप्पणी को बताया समाज में विभाजन पैदा करने वाली

उनके बयान के बाद सरकार ने नाराजगी है, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सोशल मीडिया पर लिखा-  “एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। किसी भी समाज के बहन एवं बेटियों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का परिलक्षण है।

टिप्पणी सामाजिक समरसता, संवैधानिक मर्यादा दोनों के विरुद्ध

एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी से ऐसे विचार न केवल सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि प्रशासनिक गरिमा पर भी प्रश्न उठाते हैं।सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा मातृशक्ति के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी करना सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादा दोनों के विरुद्ध है।

जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो आवश्यक कार्रवाई होगी : शुक्ला 

इस प्रकार की सोच भारतीय संस्कृति और हमारी परंपराओं का भी अपमान करती है। सभी वर्गों का सम्मान हमारी परंपरा का मूल है और किसी भी समुदाय विशेष को लक्षित कर की गई टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी आधार पर सरकार द्वारा उनसे बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया है जो संतुष्टि प्रदायक न होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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