अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर आज नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘आनंद के आयाम’ आयोजित की गई, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शामिल हुए, उन्होंने प्रबुद्धजनों से संवाद किया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने 14 से 28 जनवरी तक मनाए गए आनंदोत्सव के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिए। मुख्यमंत्री ने फोटोग्राफी के लिए मिलिंद कुमार को प्रथम, शैलेंद्र बिहार को द्वितीय एवं सीमा अग्निहोत्री को तृतीय पुरस्कार दिया। वीडियोग्राफी में सैयद अफजान को प्रथम, राजा खान को द्वितीय एवं जीवन रजक को तृतीय पुरस्कार दिया। पुरस्कार स्वरुप प्रथम पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये दिए गए वहीं द्वितीय पुरस्कार में 15 हजार रुपये एवं तृतीय पुरस्कार में 10 हजार रुपये दिए गए।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ मोहन यादव ने कहा कि हम दूसरों के सुख में भी अपने आनंद की अनुभूति प्राप्त कर लें, यही सनातन संस्कृति और भारत की चेतना का आधार है। उन्होंने कहा मानव जीवन में आनंद के आयाम, हमारे सुख और दु:ख के बीच के अंतर को समझने से पता चलते हैं।
सीएम एन उदाहरणों के माध्यम से समझाया आनंद
डॉ मोहन यादव ने कई उदाहरणों के माध्यम से आनंद की व्याख्या की, उन्होंने कहा यशोदा मैया और नंद बाबा ने कन्हैया के लालन-पालन में ही आनंद की अनुभूति की। उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि यह किसी और का शिशु है। डॉ यादव ने कहा वर्ष 1956 के विश्व हिंदू सम्मेलन में मार्गेट थेचर ने भारत और इंग्लैंड की संस्कृति का मूल अंतर सबको समझाया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय परिवारों की व्यवस्था में अगर कोई एक सदस्य भी कमाई करता है तो पूरा परिवार आनंद और सम्मान के साथ जीवन जीता है। यह दुनिया में सिर्फ भारत में ही संभव है।
साधु संतों की कठिन तपस्या में उनका आनंद भाव
डॉ यादव ने सिंहस्थ में साधु संतों की तपस्या का उदाहरण देते हुए उनके आनंद को परिभाषित किया, मुख्यमंत्री ने कहा साधु संत, कभी कांटों पर सोते हुए, कभी अग्नि स्नान करते हुए तो कभी और कठिन तपस्या करते दिखाई देते हैं लेकिन इस दौरान उन्हें कभी कष्ट होते नहीं देखा गया क्योंकि वो ऐसे समय भगवान की तपस्या साधना के आनंद में डूबे होते हैं।