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MP में IPS प्रमोशन विवाद गहराया: उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, कहा “बीजेपी सरकार में न सिस्टम चल रहा है न प्रशासन”

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की IPS पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से लंबित होने पर प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभिन्न राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में यह प्रक्रिया काफी पीछे है और इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है।
MP में IPS प्रमोशन विवाद गहराया: उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, कहा “बीजेपी सरकार में न सिस्टम चल रहा है न प्रशासन”

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने राज्य पुलिस अधिकारियों के सालों से अटले प्रमोशन को लेकर सवाल किए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अन्य राज्यों में 2011-2012 बैच के अधिकारी आईपीएस बन चुके हैं, लेकिन यहां 1997 बैच के अनुभवी अफसर 28 साल से इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “यह महज देरी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की नाकामी है। 48 पद खाली पड़े हैं, पात्र अधिकारी तैयार हैं, फिर भी प्रमोशन अटका हुआ है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि जब अपने ही अधिकारियों के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं है तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा।

सालों से अटका हुआ है प्रमोशन

बता दें कि मध्यप्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है। देश के ज्यादातर राज्यों में SPS अधिकारी नियमित समय पर IPS कैडर में पदोन्नत हो जाते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश इस मामले में काफी पिछड़ गया है। स्थिति यह है कि 1997 बैच के SPS अधिकारी पूरे 28 साल से IPS प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, कर्नाटक में 2012 बैच और केरल में 2011 बैच के अधिकारी आईपीएस बन चुके हैं। छत्तीसगढ़ में 2002 बैच के अफसर भी प्रमोशन प्राप्त कर चुके हैं लेकिन मध्यप्रदेश में 2010 बैच के कई अधिकारी अभी भी कतार में खड़े हैं।

आईपीएस कैडर में कुल 319 पद स्वीकृत हैं, जिनमें प्रमोशन कोटे के सिर्फ 97 पद हैं। इनमें से 48 पद अभी भी खाली पड़े हैं, जबकि पात्र अधिकारी इंतजार कर रहे हैं। राज्य पुलिस सेवा में कुल 1269 अधिकारी हैं, जिनमें 265 एसपीएस स्टार स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अन्य राज्यों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डेढ़ दशक से भी ज्यादा पीछे है। कई राज्यों में 2004-2005 के बैच वाले अधिकारी भी समय पर आईपीएस बन गए, जबकि यहां 1997 बैच अभी तक अटका पड़ा है।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश में प्रशासनिक तंत्र इस कदर कमजोर हो चुका है कि खुद पुलिस अधिकारी ही प्रमोशन और न्याय के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की खबर के हवाले से उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 1997 बैच के अधिकारी भी करीब 28 वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि जब 48 पद खाली पड़े हैं और पात्र अधिकारी मौजूद हैं, तब भी प्रमोशन प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ रही है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार जब अपने ही विभागीय अधिकारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर पा रही है, ऐसे में आम नागरिकों को न्याय और सुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता का संकेत है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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