मध्यप्रदेश के बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी अपने विवादित बयानों को लेकर लगातार चर्चाओं में हैं। अपने बेटे के थार हादसे के मामले में अब उन्होंने करेरा एसडीओपी को खुलेआम धमकी देते हुए कहा है कि अगर 15 दिनों में जवाब नहीं मिला तो 10 हजार लोगों को लेकर उनके बंगले में गोबर भर देंगे।
इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि भाजपा विधायक पुलिस अधिकारी के घर हजारों लोगों को लेकर मारपीट की धमकी दे रहे हैं, जबकि गृह मंत्री पूरी तरह मौन हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश में अब मोहन भैया सरकार नहीं, सर्कस चला रहे हैं”।
क्या है पूरा मामला
शिवपुरी जिले के करेरा कस्बे में 16 अप्रैल को विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार कार से पांच लोगों को कुचल दिया था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई की और दिनेश लोधी को थाने में बुलाकर पूछताछ की। इसी दौरान एसडीओपी आयुष जाखड़ और बीजेपी विधायक के बीच तनाव बढ़ गया। इसके बाद प्रीतम लोधी ने वीडियो जारी कर एसडीओपी से कहा था कि “करेरा तुम्हारे डैडी का है क्या? मैं करेरा आऊंगा, चुनाव लड़ूंगा…अगर उसके बाप में दम है तो रोककर दिखाए।”
इस बयान पर विवाद थमा भी नहीं था कि उनका एक और वीडियो सामने आ गया जिसमें बीजेपी विधायक कह कहे हैं कि एसपी दिल्ली से निर्देश लेते हैं या फिर मोदी, अमित शाह या सिंधिया जी से? उन्होंने ये भी कहा कि पहले मेरी मुट्ठी ढाई किलो की थी अब 250 किलो की हो गई है। अगर 15 दिन में स्पष्टीकरण नहीं मिला कि मैंने कितना सहयोग किया है तो 10 हजार आदमी लेकर एसडीओपी के बंगले में गोबर भर देंगे।
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। जीतू पटवारी ने इस घटना को भाजपा शासन में कानून के राज की हकीकत बताते हुए कहा कि जब सत्ता पक्ष के लोग ही पुलिस को धमकियां देने लगें तो आम आदमी का क्या हाल होगा। उन्होंने गृह मंत्री को घेरते हुए पूछा कि क्या वे अपने विभाग पर नियंत्रण खो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों के मामलों में प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक पुलिस अधिकारी के घर हजारों लोगों को ले जाकर मारपीट की सरेआम धमकी दे रहे हैं और गृह मंत्री मौन रहकर अपने विभाग की विफलता का प्रमाण दे रहे हैं।






