मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए गए दावों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लाखों बच्चे स्कूली शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो चुके हैं और सरकार सिर्फ आंकड़ों और प्रचार के सहारे अपनी छवि चमकाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि “झूठ जितनी बार भी दोहराया जाए, वह सच नहीं बन जाता”।
दरअसल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) 28.9 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। साथ ही उन्होंने प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य होने का दावा भी किया था। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने कहा है कि झूठ को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही प्रदेश के कुल छात्र नामांकन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
जीतू पटवारी ने शिक्षा की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा
जीतू पटवारी ने कहा कि स्कूलों के विलय, शिक्षकों की कमी और विद्यालयों के बंद होने जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर वास्तव में शून्य है तो स्कूलों से गायब लाखों विद्यार्थियों का क्या हुआ। कांग्रेस नेता ने सरकार से यह भी पूछा कि प्रदेश के हजारों स्कूल अब भी एकल शिक्षक व्यवस्था पर क्यों चल रहे हैं, शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त क्यों पड़े हैं और आदिवासी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरावट का सामना क्यों कर रहा है।
बीजेपी पर लगाए आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, कॉलेजों में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और युवाओं के सामने रोजगार का संकट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इन समस्याओं का समाधान नहीं है बल्कि सिर्फ प्रचार और दावों की राजनीति है। जीतू पटवारी ने कहा है कि मध्यप्रदेश को शिक्षा मॉडल के दावों की नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर जवाबदेही और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश को शिक्षा का मॉडल नहीं, अब शिक्षा का सच चाहिए”।






