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MP के 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के PPP मॉडल पर जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, दिए 4 सुझाव

नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन में निजी भागीदारी के प्रस्ताव ने सरकारी निवेश और संस्थानों के भविष्य को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया से जुड़े खर्च, संपत्तियों और निजी भागीदार की भूमिका को सार्वजनिक करने पर जोर दिया है।
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Jitu Patwari

मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की तैयारी के बीच कांग्रेस ने बीजेपी सरकार से सवाल पूछे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि जनता के पैसे से तैयार किए गए मेडिकल कॉलेजों को निजी संचालन में देने से पहले सरकार को यह साफ करना चाहिए कि अब तक इनमें कितना सरकारी निवेश हुआ है और आगे की व्यवस्था क्या होगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज-कम-अस्पतालों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इनमें नीमच, श्योपुर और सिंगरौली के मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब इन संस्थानों की जमीन, भवन और दूसरी सुविधाओं में सरकारी पैसा लगा है, तो इनके संचालन में निजी भागीदारी क्यों लाई जा रही है, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

जीतू पटवारी ने दिए चार सुझाव

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र के जरिए चार सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पीपीपी मॉडल लागू करने से पहले इन चार बिंदुओं पर स्पष्टता देनी चाहिए।

पहला: सरकारी निवेश और संपत्तियों का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो

उन्होंने कहा कि जिन मेडिकल कॉलेजों पर जनता के हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, उनका कॉलेजवार पूरा हिसाब सामने रखा जाए। इसमें अब तक किए गए सरकारी निवेश और कॉलेज की सभी परिसंपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक हो।

दूसरा: PPP की सभी शर्तें जनता के सामने रखी जाएं

उन्होंने मांग की कि जमीन, भवन, मशीनरी, अस्पताल, मेडिकल सीटों, फीस और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़ी पीपीपी की सभी शर्तें सार्वजनिक की जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट हो कि निजी भागीदार को कितने समय के लिए संचालन दिया जाएगा।

तीसरा: सरकारी व्यवस्था मजबूत करने का जवाब दे सरकार

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सरकार डॉक्टरों, प्रोफेसरों और तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करके इन संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में काम क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि खाली पद भरने, विशेषज्ञ डॉक्टर और फैकल्टी उपलब्ध कराने तथा बेहतर सुविधाएं देने पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।

चौथा: सार्वजनिक निवेश का लाभ निजी संस्था तक सीमित न रहे

जीतू पटवारी पटवारी ने कहा कि अगर पीपीपी मॉडल लागू होता है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निवेश और जोखिम जनता का हो, जबकि लाभ निजी संस्था को मिले, ऐसी व्यवस्था न बने। उन्होंने गरीब मरीजों और मेडिकल छात्रों के हितों की स्पष्ट गारंटी तय करने की मांग की।

कांग्रेस नेता ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, प्रोफेसरों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन संस्थानों में खाली पद भरकर और बेहतर सुविधाएं देकर उन्हें मजबूत करने की कोशिश क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा है कि अगर पीपीपी मॉडल लागू किया जाता है तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि सरकारी निवेश और जोखिम जनता का हो और फायदा निजी संस्था को मिले, ऐसी व्यवस्था न बने।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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