“महाराज” को लेकर भी कमलनाथ ने खोले कई राज, किया ये दावा

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भोपाल।
कमलनाथ सरकार को प्रदेश से बाहर और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में शामिल हुए भले ही एक महिने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन कांग्रेस अब भी इस दर्द को भुला नही पाई है। सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार कांग्रेस ‘महाराज’ पर हमले बोल रही है और सरकार गिरने का सारा ठिकरा उन पर फोड़ा जा रहा है।15 महिने में ही सत्ता से बाहर हुई बौखलाई कांग्रेस सिंधिया और उनके समर्थकों की जमकर घेराबंदी में जुटी हुई है। यहां तक की पूर्व मंत्रियों ने ट्वीटर के माध्यम से सिंधिया की कई पोले खोलना शुरु कर दी है।वही समर्थकों के भी बयानों को आधार बनाकर जनता के सामने पेश किया जा रहा है। इसी बीच अबतक मौन धारण किए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया को आड़े हाथों लेते हुए कई राज खोले है।

एक निजी चैनल से चर्चा के दौरान नाथ ने खुलासा किया है कि मुझे पता था कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह जुलाई से भाजपा के संपर्क में हैं। वह इस बात को कभी पचा नहीं पाए कि वह एक लाख से अधिक वोटों से लोकसभा चुनाव हार गए। वह भी उस उम्मीदवार से जो कभी कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता था। जिसे भाजपा ने अपने पाले में लेकर उनके खिलाफ चुनाव में उतारा था। सिंधिया अपनी हार के बाद बीजेपी के संपर्क में थे, लेकिन बीजेपी की राज्य इकाई ने उन्हें कभी नहीं चाहा। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व किसी भी कीमत पर मध्य प्रदेश से दूसरी राज्यसभा सीट चाहता था। इसलिए उन्होंने सिंधिया को भाजपा की सदस्यता दिला दी।

वही कमलनाथ ने दावा किया है कि यह आंकड़ों का खेल है। अभी हमारे पास 92 विधायक और उनके पास 107 हैं। 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। इसमें कम से कम 15 सीटें भाजपा के बराबर आने के लिए जीतनी होंगी। बाकी 7 विधायकों का काम 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा मिलकर करेंगे। स्थितियां अभी ऐसी हैं कि हम 15 से ज्यादा सीटें जीतेंगे।

बता दे कि सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफे के कारण कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। 20 मार्च को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ली थी। शिवराज ने शपथ लेने के 28 दिन बाद 21 अप्रैल को मंत्रिमंडल का गठन किया। इसमें 5 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।

Gaurav Sharma
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