MP में ठंड़ का कहर जारी, कई जिलों में 5 डिग्री से नीचे पारा, आगे ऐसा रहेगा मौसम

MP में ठंड़ का कहर जारी, कई जिलों में 5 डिग्री से नीचे पारा, आगे ऐसा रहेगा मौसम

भोपाल।

एमपी में मौसम का मिजाज फिर बदल गया है।पहाडी इलाकों में हो रही बर्फबारी से शीतलहर का दौर चल रहा है और लगातार तापमान में गिरावट हो रही है।शनिवार को कई जिलों में न्यूनतम तापमान पांच डिग्री दर्ज किया गया तो कई जिलों में कोल्ड डे रहा। मौसम विभाग की माने तो अगले 24 घंटे में सिवनी, मंडला व बालाघाट जिले में हल्की गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

शनिवार को जहां गुना, भोपाल, बैतूल, शाजापुर, उज्जैन और सिवनी में कोल्ड डे रहा वही प्रदेश के बैतूल, रायसेन, रीवा और उमरियाम में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री दर्ज किया गया। भाेपाल में 11 फरवरी 1950 काे रात का तापमान सबसे कम 1.7 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 साल में 2012 में 10 फरवरी काे यह 5.4 डिग्री दर्ज था, वही 9 फरवरी 2019 काे भी यह 5.8 डिग्री रहा था। 28 शहरों में तापमान 5 से 10 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है।वहीं पिछले 24 घंटे में जबलपुर, शहडोल व होशंगाबाद संभाग के जिलों में कहीं-कहीं बारिश हुई। शेष संभागों का मौसम शुष्क रहा। रीवा, सागर, होशंगाबाद व इंदौर संभागों में सामान्य से कम तथा शेष संभागों में न्यूनतम तापमान सामान्य दर्ज किया गया।

मौसम विभाग की माने तो 24 घंटे में सिवनी, मंडला व बालाघाट जिले में हल्की गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।वही शहडोल, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, भिंड, मुरैना में हल्का कोहरा भी छाने की संभावना है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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