मौलाना मदनी ने की सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी, भड़के विश्वास सारंग ने सुनाई खरी खरी, दी ये चेतावनी

मदनी ने कहा देश की अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं, यदि न्यायपालिका संविधान व धर्मनिरपेक्षता नहीं बचाएगी तो वो Supreme होने का हक नहीं रखती।
MP Cabinet Minister Vishvas Sarang

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राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में मौलाना महमूद असद मदनी द्वारा दिए गए बयानों ने विवाद खड़ा कर दिया है, उन्होंने कहा कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं वे सुप्रीम होने का हक़ नहीं रखती। मदनी के बयान पर कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है और मदनी को चेतावनी दी है।

मौलाना मदनी ने भोपाल में कहा कि लव-जिहाद, लैंड-जिहाद और थूक-जिहाद जैसे शब्दों को मुसलमानों की तौहीन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, मदनी ने जिहाद का समर्थन करते हुए कहा कि जिहाद केवल हिंसा नहीं यह पवित्र कर्तव्य है, जहां अन्याय हो वहां जिहाद होना चाहिए, जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा। मदनी यहीं रुके उन्होंने अपने बयान में देश की अदालतों  की कार्यशैली पर भी सवाल उठाये।  

मदनी बोले-अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही

मदनी ने कहा देश की अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं, यदि न्यायपालिका संविधान व धर्मनिरपेक्षता नहीं बचाएगी तो वो Supreme होने का हक नहीं रखती, उनके इस बयान को सुप्रीम कोर्ट सहित देश की न्याय व्यवस्था का अपमान माना जा रहा है, मदनी के बयान पर भाजपा ने करारा जवाब दिया है। 

राष्ट्रीय एकता के खिलाफ कोई भी बयान सहन नहीं होगा  

कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा मौलाना मदनी हिंदुस्तान में रहना है तो वन्देमातरम तो कहना होगा फिरका परस्ती की बातें देश को तोड़ने की बातों से बहुत दिन सियासत कर ली, संविधान का मजाक उड़ाना, संवैधानिक व्यवस्थाओं का मजाक उड़ाना और अब तो सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करने की हिम्मत , वे भूल रहे हैं कि भारत में रहने वाले को संविधान का पालन करना होगा। खाते हिंदुस्तान की हैं और गाते कहीं और की हैं अब ये नहीं चलेगा, अब सरकार संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ किसी भी बयान को सहन नहीं करेगी।

Atul Saxena
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Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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