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MP विधानसभा में लोकायुक्त और CAG प्रतिवेदनों पर चर्चा की मांग, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

Written by:Shruty Kushwaha
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लोकायुक्त और कैग रिपोर्ट सरकार के कामकाज और खर्च की जांच का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं और कांग्रेस ने इसपर विधानसभा में चर्चा न होने का मुद्दा उठाया है। विपक्ष के नेता का कहना है कि इन महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर समय पर चर्चा नहीं होने से शासन से जुड़े मुद्दों की प्रभावी समीक्षा नहीं हो पा रही है और लोकतांत्रिक जवाबदेही प्रभावित हो रही है।
MP विधानसभा में लोकायुक्त और CAG प्रतिवेदनों पर चर्चा की मांग, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

Umang Singhar

मध्यप्रदेश विधानसभा में लोकायुक्त और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के प्रतिवेदनों पर अब तक चर्चा नहीं होने को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि इन महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर विस्तृत चर्चा न होना गंभीर विषय है और इससे लोकतांत्रिक जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि इन प्रतिवेदनों पर समयबद्ध चर्चा नहीं होती है तो शासन से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जनता के प्रतिनिधियों की भूमिका सीमित हो जाती है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि लोकायुक्त और CAG प्रतिवेदनों को सदन में प्राथमिकता के साथ चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर लोकायुक्त एवं नियंत्रक महालेखा परीक्षक के महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर चर्चा की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि CAG और लोकायुक्त के ये प्रतिवेदन शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए जाते हैं। इन रिपोर्टों में सरकारी खर्चों, योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, नुकसानों या कमियों का खुलासा होता है, लेकिन सदन में इन पर विस्तृत चर्चा न होने से कई जनहित के मुद्दे लंबित रह जाते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जवाबदेही प्रभावित होती है।

लोकायुक्त और कैग प्रतिवेदनों पर चर्चा की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि वे संबंधित प्रतिवेदनों पर सकारात्मक और समयबद्ध चर्चा कराने का निर्देश दें, ताकि सदन इन रिपोर्टों की सिफारिशों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कर सके। बता दें कि CAG रिपोर्ट सरकारी खर्च, योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र लेखा परीक्षा का आधिकारिक दस्तावेज होती है। ये रिपोर्ट सरकारी खातों और योजनाओं का ऑडिट दस्तावेज होती है जिसे भारत के संवैधानिक प्राधिकारी द्वारा तैयार किया जाता है। इसमें विभागों के वित्तीय लेनदेन, योजनाओं के क्रियान्वयन, नियमों के पालन और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ी कमियों या अनियमितताओं का उल्लेख होता है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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