मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में बढ़ती शिक्षित बेरोजगारी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पिछले छह महीनों में 1.12 लाख नए स्नातक बेरोजगार रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत हुए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने बेरोजगारी के वास्तविक आंकड़ों को छिपाने के लिए सूची से बड़ी संख्या में युवाओं को बाहर कर दिया, लेकिन इसके बावजूद शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार द्वारा 12वीं पास बेरोजगारों की संख्या में दिखाई गई भारी कमी संदिग्ध है। उनके मुताबिक यह आंकड़े उसी तरह अविश्वसनीय हैं, जैसे प्रदेश में निवेश को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हजारों करोड़ रुपये का निवेश वास्तव में हो रहा है तो उसका असर रोजगार सृजन में क्यों दिखाई नहीं दे रहा।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा
कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर बेरोजगारी के आंकड़ों में ‘कारीगरी’ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में छह महीने के अंदर 1.12 लाख नए स्नातक बेरोजगार रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत हो गए हैं, जबकि सरकार ने बारहवीं पास बेरोजगारों की संख्या में अप्रत्याशित कमी दिखाकर आंकड़ों की कारीगरी की है। पूर्व सीएम ने सरकार से सवाल किया कि जब वो हजारों करोड़ रुपये निवेश का दावा करती है तो यह निवेश आखिर जा कहां रहा है?
उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार ने “बेरोजगार” शब्द को बदलकर “आकांक्षी युवा” कहना शुरू कर दिया है, लेकिन शब्द बदलने से हकीकत नहीं बदलती। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार की स्थिति निवेश के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनने दे रही है। उन्होंने कहा कि निवेश सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि विश्वास और पारदर्शिता से आता है। यदि सरकार ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ काम करे तो प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
विधानसभा में पेश जानकारी
विधानसभा में तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में रोजगार पोर्टल के आंकड़े पेश किए। इसके अनुसार इस साल 30 जून तक प्रदेश रोजगार पोर्टल पर 17.71 लाख से अधिक युवा रोजगार की प्रतीक्षा में पंजीकृत हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में प्रदेश में पंजीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर बेरोजगारों की संख्या 6.17 लाख थी, जो जून 2026 तक बढ़कर 7.29 लाख से अधिक हो गई। यानी छह महीनों में करीब 1.12 लाख शिक्षित बेरोजगार जुड़े। वहीं दूसरी ओर, 12वीं पास पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या इसी अवधि में लगभग 12.95 लाख से घटकर 6.72 लाख रह गई। इन आंकड़ों को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि जहां उच्च शिक्षित बेरोजगार लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं 12वीं पास बेरोजगारों में इतनी बड़ी गिरावट किस आधार पर दर्ज की गई। इसी मुद्दे को आधार बनाकर कमलनाथ ने सरकार के रोजगार और निवेश संबंधी दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।






