जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जब मनुष्य अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट लगन से असंभव को भी संभव कर दिखाता है। ऐसे ही एक प्रेरक उदाहरण के रूप में जबलपुर के हिमांशु सोनी ने शारीरिक अक्षमता की सभी बाधाओं को पार करते हुए डिप्टी कलेक्टर का प्रतिष्ठित पद हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है। यह केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक है जो विषम परिस्थितियों में भी अपने मनोबल को बनाए रखने का साहस रखते हैं। हिमांशु की यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि आत्मविश्वास और अथक परिश्रम ही सफलता का सुनिश्चित मार्ग प्रशस्त करते हैं।
अपने नए दायित्वों की शुरुआत करते हुए, हिमांशु सोनी ने जबलपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपने पहले दिन की जॉइनिंग की। यह उनके लिए और उनके परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। इस अवसर पर उन्होंने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के साथ बैठकर जनसुनवाई में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने आम जनमानस की समस्याओं को बेहद करीब से समझा। बिजली, ऊर्जा तथा शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतों और मुद्दों को समझने का यह अनुभव उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जिसने उन्हें अपने आगामी प्रशासनिक कर्तव्यों के लिए तैयार किया। यह उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि वे पहले दिन से ही जनसेवा के इस महत्वपूर्ण कार्य से जुड़ गए।
हिमांशु सोनी ने साझा किया संघर्ष का सफर
हिमांशु ने अपनी सफलता के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि उनकी तैयारी किसी भौतिक कोचिंग संस्थान पर निर्भर नहीं थी। उन्होंने घर पर ही ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करते हुए अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखा। यह दर्शाता है कि आधुनिक युग में संसाधनों तक पहुंच और व्यक्तिगत लगन मिलकर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं। इंदौर में साक्षात्कार देने के बाद, वर्ष 2024 बैच में उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ, जो उनकी कड़ी मेहनत और अटूट दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है। इस पूरी यात्रा में उनके परिवार का सहयोग अप्रतिम रहा। उनके माता-पिता और अन्य परिजनों ने हर कदम पर उनका भरपूर साथ दिया, चाहे वह किताबें खरीदने की बात हो, ऑनलाइन कोर्स की व्यवस्था हो या अन्य किसी भी जरूरत को पूरा करना हो। परिवार का यह अटूट समर्थन ही उनकी सफलता की नींव बना।
हिमांशु की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनके पिता, महेंद्र सोनी, ने असीम गर्व और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा और सबसे सुखद दिन बताया। महेंद्र सोनी ने कहा कि उनके बेटे ने तमाम शारीरिक चुनौतियों और बड़े संघर्षों को धैर्य और साहस के साथ पार करके यह गौरवपूर्ण मुकाम हासिल किया है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए और युवाओं को प्रेरित करने के लिए उन्होंने एक प्रेरणादायक कविता सुनाई: “ख्वाहिशों से नहीं गिरते फूल झोली में, कर्म की साख को हिलाना होगा, कुछ नहीं होगा अंधेरों को कोसने से, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा।” यह कविता कर्मठता और आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करती है, जो सफलता के लिए अनिवार्य है।
युवाओं के लिए मिसाल बने डिप्टी कलेक्टर हिमांशु सोनी
आज के युवाओं के लिए हिमांशु सोनी का संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि असफलताओं से बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि असफलताएं ही सफलता की सीढ़ियां होती हैं। निरंतर अभ्यास और अपनी मेहनत पर अटूट विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इन सिद्धांतों का पालन करता है, उसे एक न एक दिन निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है। हिमांशु सोनी की यह यात्रा उन सभी के लिए एक उज्ज्वल उदाहरण है जो जीवन में बड़ी ऊंचाइयों को छूने का सपना देखते हैं, और यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयास से कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।






