राज्यसभा चुनाव में नामांकन पत्र निरस्त किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका नामांकन गलत आधारों पर खारिज किया गया, जबकि अन्य प्रत्याशियों के नामांकन, जिन्हें निरस्त किया जाना चाहिए था, उन्हें स्वीकार कर लिया गया। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा पर निशाना साधा है और न्यायपालिका से न्याय की उम्मीद जताई है।
जबलपुर हाईकोर्ट में दायर इस चुनाव याचिका में निर्वाचित तीनों प्रत्याशियों के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। साथ ही निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और चुनाव आयोग को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया और उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उन्हीं के पास सुरक्षित हैं। मीनाक्षी नटराजन के अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने बताया कि यह याचिका रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1951 की धारा 100 के तहत प्रस्तुत की गई है। उन्होंने निर्धारित 45 दिनों की समय-सीमा के भीतर यह चुनाव याचिका दायर की है, जिस पर जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट से न्यायोचित निर्णय की जताई उम्मीद
अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि गलत तरीके से नामांकन निरस्त किए जाने से निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव का संवैधानिक अधिकार सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाईकोर्ट इस मामले में सभी तथ्यों पर गहन विचार करेगा और एक न्यायोचित निर्णय देगा। फिलहाल यह याचिका न्यायालय में विचाराधीन है। मीनाक्षी नटराजन ने निर्वाचन आयोग के अधिकारी द्वारा अपने चुनावी दावे को खारिज किए जाने को पूरी तरह से गलत करार दिया। उनका स्पष्ट आरोप है कि जिस मामले का संज्ञान तक नहीं लिया गया था, उसी को आधार बनाकर उनकी आपत्ति को निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इस बात को दोहराया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हाईकोर्ट से न्याय मिलने की प्रबल उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद, 9 जून को मीनाक्षी का नामांकन फॉर्म निरस्त कर दिया गया था। नटराजन ने इस फैसले को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले में सीधे रिट याचिका नहीं सुनी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सलाह दी थी कि यदि उन्हें फैसले पर आपत्ति है, तो वे चुनाव याचिका दायर करें। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “पहले वोट चोरी होती थी, इस बार सीट चोरी हुई।”
मीनाक्षी नटराजन ने जंतर-मंतर की घटना पर केंद्र सरकार को घेरा
अपने राजनीतिक बयानों के क्रम में, मीनाक्षी नटराजन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई घटना का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे “देश के इतिहास का काला दिन” बताया, जब छात्राओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया। उनका आरोप है कि सरकार हर आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है और आंदोलन करने वालों को आतंकवादी बताने की कोशिश की जा रही है। मीनाक्षी ने स्पष्ट किया कि देश के युवा देश के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के हित में संघर्ष कर रहे हैं और छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के आंदोलन की तरह आज भी युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब सरकार की कथनी और करनी बेनकाब होने का समय आ गया है।
यूसीसी विधेयक पर भी उठाए सवाल
इसके अतिरिक्त, यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक को लेकर भी मीनाक्षी नटराजन ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न धर्मों, जातियों और विशेष रूप से आदिवासी समाज की अपनी अलग-अलग परंपराएं और अधिकार हैं। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि समानता और समता के नाम पर वह वास्तव में क्या लागू करना चाहती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या वह सभी समुदायों की परंपराओं को एक ही तरीके से लागू करवाना चाहती है।





