मध्यप्रदेश में सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने अवकाश के दिनों में भी मंडियां खुली रखने और दोनों फसलों की खरीदी जारी रखने का निर्णय लिया है। इससे किसान छुट्टियों के कारण मंडियां बंद होने की स्थिति में अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करने से बच सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों की सुविधा तथा उनकी उपज के सुगम उपार्जन के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की मेहनत का उचित मूल्य दिलाना और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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फसल बेचने के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार
खरीफ सीजन में सोयाबीन और मक्का की आवक के दौरान मंडियों का नियमित संचालन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। साप्ताहिक अवकाश और त्योहारों के कारण मंडियां बंद रहने पर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में अवकाश के दिनों में भी खरीदी जारी रखने के निर्णय से किसानों को उपज बेचने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। इस व्यवस्था से मंडियों में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों को होने वाली असुविधा कम करने और उपज की बिक्री प्रक्रिया सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन बढ़ने का अनुमान
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के खरीफ 2026 के अनुमान के अनुसार, मध्यप्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 57.16 लाख टन रहने की संभावना है जबकि पिछले वर्ष उत्पादन 43.24 लाख टन था। यह लगभग 32.2 प्रतिशत की वृद्धि है। राज्य में सोयाबीन की बुवाई का रकबा भी बढ़ा है। फसल की आवक के दौरान मंडियों में खरीदी और नीलामी की व्यवस्था सुचारु रखना किसानों के लिए जरूरी है। अवकाश के दिनों में भी मंडियां खुली रखने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोयाबीन के लिए भावांतर योजना भी लागू
प्रदेश सरकार ने खरीफ के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को राहत देने के उद्देश्य से भावांतर भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। योजना का उद्देश्य निर्धारित नियमों के अनुसार बाजार में मिलने वाले मूल्य और संदर्भ मूल्य के अंतर की भरपाई के माध्यम से किसानों को राहत देना है। सरकार के ताजा निर्णय में सोयाबीन के साथ मक्का की खरीदी को भी शामिल किया गया है। अवकाश के दिनों में मंडियों का संचालन जारी रहने से दोनों फसलों के उत्पादकों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
