
Farmers protest against 2026-27 opium policy
केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘अफीम नीति वर्ष 2026-27’ के कड़े नियमों और लंबित मांगों को लेकर मालवा-मेवाड़ अंचल के अफीम उत्पादक किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। नीमच से किसान नेता राजकुमार अहिर, मल्हारगढ़ विधानसभा से श्यामलाल जोकचंद एवं अन्य किसान प्रतिनिधियों के नेतृत्व में नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (उपायुक्त कार्यालय) नीमच के बाहर एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन और घेराव किया।
धरने पर बैठे आक्रोशित किसानों ने स्थानीय सांसदों और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपायुक्त नारकोटिक्स के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने उनके हितों की अनदेखी के आरोप लगाये
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि नई नीति के तहत कई किसानों के पुराने चीरे वाले पट्टे निरस्त कर उन्हें सीपीएस (CPS) पद्धति में बदल दिया गया है, तो वहीं कई किसानों ने 53 किलो डोडा देकर भी अपनी नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि अफीम की खेती में बढ़ती लागत और कड़ी मेहनत के बावजूद वर्तमान नीति में उनके हितों की अनदेखी की गई है।
ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख 6 मांगें
मॉर्फिन की मात्रा 3.7 प्रतिशत हो: वर्तमान नीति में मॉर्फिन का मानक 4.2 से बढ़ाकर 4.4 किए जाने से कई किसानों के चीरे वाले पट्टे 5 आरी के सीपीएस पट्टों में बदल गए हैं, इसलिए राहत देते हुए मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा 3.7 की जाए।
सीपीएस किसानों को मिले 10 आरी का चीरा पट्टा: प्रतिवर्ष 90 किलोग्राम से अधिक औसत डोडा उत्पादन देने वाले किसानों को भी मात्र 5 आरी का पट्टा देकर अन्याय किया गया है, उन्हें 10 आरी का चीरा लगाने वाला पट्टा दिया जाए।
लंबित एवं नए पट्टों की बहाली: वर्ष 1997-98 से अब तक के सभी पात्र किसानों के अफीम पट्टे सहानुभूतिपूर्वक बहाल किए जाएं और नए पात्र किसानों को अफीम खेती से जोड़ने के लिए नए लाइसेंस जारी हों।
अफीम का मूल्य 1 लाख रुपये प्रति किलो हो: खाद, दवाई, बिजली, कृषि उपकरणों और मजदूरी की बढ़ती लागत को देखते हुए अफीम का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए।
डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट से बाहर किया जाए: डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.02 प्रतिशत से कम होती है, अतः एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 व 8/29 पर पुनर्विचार कर डोडाचूरा को इससे बाहर किया जाए ताकि जेलों में बंद हजारों किसानों को राहत मिल सके।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित पट्टों की बहाली: ओलावृष्टि व प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसल को विभाग की मौजूदगी में नष्ट कराने के बावजूद जिन पट्टों को सीपीएस में डाल दिया गया था, उन्हें पुनः चीरे वाले पट्टों में बहाल किया जाए।
किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अफीम नीति 2026-27 में तत्काल संशोधन कर इन मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्र का अन्नदाता आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होगा।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट

