मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की तैयारी को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सरकारी संसाधनों से तैयार मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया कि जब जमीन सरकारी है और निर्माण में जनता के पैसे का इस्तेमाल हुआ है तो फिर इनके संचालन में निजी क्षेत्र को क्यों लाया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश सरकार नौ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी कर रही है। इनमें नीमच, सिंगरौली और श्योपुर के मेडिकल कॉलेज भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कॉलेजों के निर्माण पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कांग्रेस नेता ने उज्जैन मेडिकल कॉलेज का भी जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2021 में इसे पीपीपी मॉडल पर देने का विरोध हुआ था, लेकिन अब इसे भी इसी व्यवस्था के तहत चलाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की तैयारी
मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की तैयारी के बीच अब इसके दायरे और शर्तों को लेकर तस्वीर सामने आ रही है। प्रस्ताव में नौ मेडिकल कॉलेजों के साथ 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी शामिल किया गया है। इनमें नीमच, सिंगरौली, श्योपुर, मंडला और राजगढ़ जैसे कॉलेज हैं, जो केंद्र प्रवर्तित योजना के तहत तैयार हुए हैं। इन कॉलेजों के निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की हिस्सेदारी रही है।
प्रस्ताव में ऐसे कॉलेज भी शामिल हैं जिन्हें पूरी तरह राज्य सरकार के खर्च से तैयार किया गया है। चालू मेडिकल कॉलेजों में भवन, मशीनरी, फर्नीचर और दूसरी सुविधाओं को मिलाकर करीब चार हजार करोड़ रुपये के सरकारी निवेश का अनुमान बताया जा रहा है। इसी वजह से पीपीपी मॉडल में जाने के बाद इन संस्थानों के संचालन, सरकारी संसाधनों और कॉलेजों में काम कर रहे फैकल्टी की भूमिका को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
उमंग सिंघार ने घेरा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस फैसले को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे और सरकारी जमीन-इंफ्रास्ट्रक्चर पर बने संस्थानों का संचालन निजी कंपनियों को सौंपना स्वास्थ्य सेवाओं को मुनाफे का मॉडल बनाने जैसा है। उन्होंने कहा कि जमीन सरकार की, पैसा जनता का और इंफ्रास्ट्रक्चर सरकारी है तो इन संस्थानों का संचालन निजी हाथों में देने का औचित्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य को निजी मुनाफे का मॉडल मत बनाइए।
₹4,000 करोड़ खर्च करके बनाए गए मेडिकल कॉलेज, अब PPP के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी!
मध्यप्रदेश सरकार 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल पर देने की तैयारी में है। इनमें नीमच, सिंगरौली और श्योपुर के कॉलेज भी शामिल हैं, जो सरकारी खर्च से तैयार हुए हैं।
जिस उज्जैन…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 17, 2026






