मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के दौरान सामने आए कीमतों के भारी अंतर और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल किया कि सरकारी खरीदी में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के मामले सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
दरअसल नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का अधिकारियों को खरीदी में गड़बड़ियों के संबंध में चेतावनी देते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए पूछा है कि वह कब तक जवाबदेही से बचती रहेगी।
ये भी पढ़ें
क्या है मामला
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की एक बैठक में संजय दुबे ने प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी में कीमतों के बड़े अंतर का मुद्दा उठाया। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में GeM पोर्टल के जरिए लगभग 1134 करोड़ रुपये की खरीदी की। विभागीय विश्लेषण में अनुमान जताया गया है कि यदि वस्तुओं की खरीद तुलनीय औसत दरों पर होती तो लगभग 250 करोड़ रुपये की बचत संभव थी।
संजय दुबे ने अधिकारियों के सामने एक ही तरह की वस्तुओं को अलग-अलग कीमतों पर खरीदे जाने के उदाहरण भी रखे। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक नगरीय निकाय में कचरा वाहन लगभग दो लाख रुपये में खरीदा गया जबकि दूसरे निकाय में इसी तरह के वाहन की कीमत करीब छह लाख रुपये बताई गई। इस अंतर को लेकर खरीद प्रक्रिया, दरों के निर्धारण और अतिरिक्त सामान के नाम पर कीमत बढ़ाए जाने की आशंका पर सवाल उठे। बैठक में कुछ निकायों द्वारा महंगे कचरा वाहनों की खरीद का मुद्दा भी सामने आया। सरकारी खरीदी में कीमतों के अंतर का मामला सिर्फ कचरा वाहनों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। बैठक में 200 एलईडी लाइटों की खरीदी पर लगभग 60 लाख रुपये खर्च किए जाने का मामला भी सामने आया है।
उमंग सिंघार ने किए सवाल
संजय दुबे के बयान और सरकारी खरीदी में सामने आए कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने बीजेपी सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही खरीदी में गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अब और क्या सबूत चाहिए और सरकार कब तक जवाबदेही से बचती रहेगी कांग्रेस नेता ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
