मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार (10 फरवरी 2026) को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रिपरिषद की इस बैठक में प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इसमें सबसे अहम म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन रहा।
इसके तहत अब परिवार पेंशन के लिये पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री भी शामिल होंगी। यह संशोधन ना सिर्फ महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करेगा बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने में भी मदद करेगा। इसके साथ ही जो बेटियां कठिन परिस्थितियों में अकेले जीवन गुजार रही हैं, उन्हें परिवार पेंशन का लाभ मिल सकेगा। महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है। बता दें कि अब तक प्रदेश के कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था लागू नहीं थी। 2005 के पहले नियुक्त कर्मचारियों के परिवारजनों को इस सुविधा का लाभ मिल रहा था। इस फैसले से करीब 3 लाख कर्मचारियों के परिजनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी पेंशन की हकदार
- मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है।अनुमोदन अनुसार नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।
- प्रस्तावित नियमों में प्रक्रियाओं एवं अधिकारिताओं को सहज बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को सुविधा होगी। संबंधित प्रकरणों का निराकरण समयसीमा में हो सकेगा। सेवानिवृत्तों को सारांशीकरण कराया जाने में सुविधा होगी तथा पेंशन सारांशीकरण मूल्य की गणना में सुविधा होगी।
- मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम-44 के अंतर्गत परिवार पेंशन के लिए पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी सम्मिलित किया गया है।
यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे
- मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।
- प्रमुख नवीन प्रावधान अंतर्गत अभिदाता की मृत्यु की दशा में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान किया गया है।
- केन्द्र तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ा जायेगा। निलम्बन अवधि में अभिदाता तथा नियोक्ता के अंशदान का प्रावधान किया।
- इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत एवं स्पष्ट प्रक्रिया, अंशदान की दर, गणना एवं विलंब की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारण के साथ सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र एवं मृत्यु की दशा में निकास प्रावधान किया गया है।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता निर्धारण एवं भुगतान की सुस्पष्ट प्रक्रिया होगी। विभागीय जांच (सेवा निवृत्ति उपरांत) आदेश के संदर्भ में उपदान से वसूली संभव होगी।
- विभागीय जांच की अवधि में नियोक्ता के अंशदान का भुगतान रोका जाना, सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व अभिदाता अंशदान रोका जाना और सेवानिवृत्ति उपरांत विभागीय जांच संस्थित किये जाने का प्रावधान के साथ नियमों के निवर्तन और शिथिलीकरण के संबंध में राज्य शासन की शक्ति के प्रावधान शामिल है।





