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पूर्व CM जयराम ठाकुर ने मोदी सरकार की ट्रेड डील का किया बचाव, कहा – ‘सेब बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित’

Written by:Rishabh Namdev
Published:
हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों से सेब बागवानों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण विदेशी सेब की कीमत घरेलू सेब से हमेशा ज्यादा रहेगी, जिससे बागवानों के हित सुरक्षित हैं।
पूर्व CM जयराम ठाकुर ने मोदी सरकार की ट्रेड डील का किया बचाव, कहा – ‘सेब बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित’

हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानों के बीच विदेशी सेब के आयात को लेकर चल रही चिंताओं पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विराम लगाने का प्रयास किया है। उन्होंने शिमला से एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ हुए व्यापार समझौतों में बागवानों के हितों का पूरा ध्यान रखा है और उन्हें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

जयराम ठाकुर ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए बागवानों को आश्वस्त किया कि भाजपा उनके हितों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां यह सुनिश्चित करती हैं कि विदेशी सेब भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर न बिक सके।

कैसे सुरक्षित हैं बागवानों के हित?

जयराम ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार ने सेब आयात को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। इसमें न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price), सीमित कोटा और सेफगार्ड जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन नियमों के कारण किसी भी देश से आने वाले सेब की लैंडिंग कॉस्ट (भारत में पहुंचने की कीमत) हिमाचल के सेब से अधिक ही रहती है।

उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा:

  • अमेरिका: यहां से आने वाले सेब पर 80 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य और 25% आयात शुल्क लागू है। इसके चलते अमेरिकी सेब की लैंडेड कीमत लगभग 105 रुपये प्रति किलो पड़ती है।
  • यूरोपीय संघ: EU देशों से आने वाले सेब पर भी 80 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य लागू है, जिससे उनकी लैंडेड कीमत 96 रुपये प्रति किलो से कम नहीं हो सकती।
  • न्यूजीलैंड: यहां से आने वाला सेब उच्च न्यूनतम आयात मूल्य और शुल्क के कारण लगभग 140 रुपये प्रति किलो की प्रीमियम श्रेणी में ही भारत पहुंचता है।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी देशों के लिए आयात का एक कोटा निर्धारित है। यदि कोई देश उस कोटे से अधिक सेब का आयात करता है, तो उस पर लगने वाला शुल्क और भी बढ़ जाएगा।

“मोदी सरकार देश के सभी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी हाल में उनसे समझौता नहीं होगा। केंद्र सरकार ने सेब आयात के लिए न्यूनतम आयात मूल्य, सीमित कोटा, और सेफगार्ड प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया है, जिससे सस्ता विदेशी सेब भारतीय मंडियों में आकर हिमाचल के बागवानों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष

उत्पादन और आयात के आंकड़े

जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सेब का कुल घरेलू उत्पादन लगभग 22 लाख मीट्रिक टन है, जबकि कुल आयात लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन के आसपास ही रहता है। यह दिखाता है कि आयात घरेलू उत्पादन की तुलना में काफी सीमित है और पूरी तरह एक विनियमित ढांचे के तहत किया जाता है।

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में सेब के मुद्दे पर भ्रम फैलाने के प्रयास हुए, लेकिन आज नीतिगत स्पष्टता और तथ्यों ने यह सिद्ध कर दिया है कि मोदी सरकार ने हर स्तर पर सेब बागवानों के हितों की रक्षा की है।” उन्होंने हिमाचल के बागवानों को भरोसा दिलाया कि उनके भविष्य और आय को सुरक्षित रखने के लिए भाजपा सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।

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