जब कोई श्रद्धालु या पर्यटक उज्जैन आता है, तो उसकी पहली इच्छा महाकाल के दर्शन की होती है। लेकिन अब शहर में प्रवेश करते ही लोगों को ऐसा अनुभव मिलेगा कि वे किसी सामान्य शहर में नहीं, बल्कि एक प्राचीन आध्यात्मिक राजधानी में प्रवेश कर रहे हैं। उज्जैन की पहचान सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी संस्कृति, धर्म और ज्योतिष परंपरा की रही है।
इसी पहचान को और मजबूत बनाने के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण ने शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर 9 भव्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना तैयार की है। इन द्वारों को इस तरह बनाया जाएगा कि हर आने वाला व्यक्ति उज्जैन की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को तुरंत महसूस कर सके।
उज्जैन विकास प्राधिकरण की बड़ी योजना
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए लगभग 92 करोड़ रुपये की लागत से इन प्रवेश द्वारों के निर्माण का निर्णय लिया है। इन द्वारों का निर्माण सिर्फ सजावट के लिए नहीं होगा, बल्कि ये उज्जैन की परंपरा, सिंहस्थ कुंभ, खगोल विज्ञान और सनातन संस्कृति को दर्शाएंगे।
योजना के अनुसार इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड सहित शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर ये प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। हर दिशा से आने वाले यात्रियों को एक ही संदेश मिलेगा कि वे महाकाल की नगरी में प्रवेश कर चुके हैं। इन द्वारों की डिजाइन भी खास होगी। इनमें मंदिर शैली की झलक, प्राचीन शिल्पकला और धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किया जाएगा, ताकि शहर की पहचान और मजबूत हो सके।
क्यों जरूरी है उज्जैन के लिए यह परियोजना
उज्जैन देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक शहरों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा सिंहस्थ कुंभ जैसे बड़े आयोजन उज्जैन की वैश्विक पहचान बनाते हैं। लेकिन लंबे समय से शहर में प्रवेश करते समय किसी विशेष पहचान का अनुभव नहीं होता था।
जब कोई शहर अपनी संस्कृति को प्रवेश द्वार से ही दिखाने लगे, तो वह यात्रियों के मन में अलग छाप छोड़ता है। इससे उज्जैन आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को फायदा होगा।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों को क्या होगा फायदा
इन नए प्रवेश द्वारों का सबसे बड़ा फायदा पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा। लोग फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करेंगे, जिससे उज्जैन की पहचान और फैलेगी। यह शहर के लिए मुफ्त प्रचार जैसा होगा।
स्थानीय लोगों के लिए भी यह गर्व की बात होगी कि उनका शहर अब और भव्य रूप में सामने आएगा। सड़क किनारे के इलाकों का भी विकास होगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों की स्थिति सुधरेगी। साथ ही बेहतर सड़कों और सुंदर प्रवेश मार्गों से शहर में आने-जाने का अनुभव भी बेहतर होगा। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सामान्य पर्यटन भी बढ़ सकता है।
सिंहस्थ, सनातन और इतिहास की झलक दिखाएंगे द्वार
इन प्रवेश द्वारों की डिजाइन उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। शहर को कालगणना का केंद्र भी माना जाता रहा है और प्राचीन काल में उज्जैन खगोल विज्ञान का महत्वपूर्ण स्थान था। सिंहस्थ कुंभ, महाकाल मंदिर, क्षिप्रा नदी और प्राचीन मंदिरों की झलक इन द्वारों में देखने को मिलेगी। यानी कोई भी व्यक्ति जब शहर में प्रवेश करेगा, तो उसे तुरंत उज्जैन की आध्यात्मिकता का एहसास होगा। योजना का मकसद सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि शहर की आत्मा को दर्शाना है। आने वाले समय में ये प्रवेश द्वार उज्जैन की पहचान बन सकते हैं।





