धर्म और इतिहास की नगरी उज्जैन एक बार फिर देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने जा रही है। 12 फरवरी से यहां 139 दिनों तक चलने वाला विक्रमोत्सव शुरू होगा, जिसमें आस्था, संस्कृति, इतिहास और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। शहर के घाट, मंदिर, सभागार और सांस्कृतिक स्थल लगातार कार्यक्रमों से जीवंत बने रहेंगे।
उत्सव की खास बात यह है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि इसमें शोध संगोष्ठियां, नाट्य प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिल्म प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और वैज्ञानिक गतिविधियां भी शामिल होंगी। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्म के साथ ज्ञान और मनोरंजन का भी अनुभव मिलेगा।
क्या है विक्रमोत्सव और क्यों है खास?
विक्रमोत्सव उज्जैन में हर साल सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति और उनकी विरासत को समर्पित होकर मनाया जाता है। उज्जैन को प्राचीन काल में उज्जयिनी कहा जाता था और यह सम्राट विक्रमादित्य की राजधानी मानी जाती थी।
इस बार का आयोजन और भी बड़ा और लंबा रखा गया है, ताकि प्रदेश और देश के अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। सरकार का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन करना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को इतिहास और विज्ञान से जोड़ना भी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तैयारियों की समीक्षा के दौरान कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पक्ष को भी जनता तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए विज्ञान और तकनीकी संस्थानों को भी कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है।
12 फरवरी से शुरुआत
उत्सव की शुरुआत 12 फरवरी से होगी और पूरे शहर में उत्साह का माहौल रहेगा। कलश यात्रा, बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आयोजन का भव्य आगाज किया जाएगा।
15 फरवरी से पूरे प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ होगा। इस दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। महादेव की आराधना, शिवभक्ति और धार्मिक आयोजनों के साथ विक्रमोत्सव और अधिक भव्य रूप ले लेगा।
शिव पुराण कथा, नाट्य मंचन और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां
16 से 20 फरवरी तक शिव पुराण कथा का आयोजन होगा, जिसमें देशभर से आए कथा वाचक और श्रद्धालु शामिल होंगे। इसी दौरान 16 से 25 फरवरी तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाट्य मंचन भी होंगे। इन नाटकों में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके न्याय और शासन की कहानियों को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी को इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।
कवि सम्मेलन, फिल्म प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे खास
उत्सव के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, अलग-अलग भाषाओं की कवि गोष्ठियां और लोक संस्कृति के कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि युवा वर्ग इन विषयों को रोचक तरीके से समझ सके।
गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट पर सूर्य उपासना का विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके अलावा उज्जयिनी गौरव दिवस के दौरान शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण समारोह भी होगा। इस दौरान विक्रम पंचांग का नया संस्करण भी जारी किया जाएगा और सांगीतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।





