उज्जैन की सुबह इन दिनों कुछ अलग ही होती है। मंदिरों की घंटियां, हर हर महादेव के जयकारे और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की भीड़ शहर की सड़कों पर दिखाई देने लगी है। कारण है शिव नवरात्र उत्सव, जिसकी शुरुआत आज से महाकाल की नगरी उज्जैन में हो चुकी है। भक्तों के मन में उत्साह है क्योंकि आने वाले दिनों में बाबा महाकाल दूल्हा स्वरूप सहित कई दिव्य रूपों में दर्शन देंगे।
महाकाल मंदिर में यह समय सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि भक्ति, परंपरा और उत्सव का संगम बन जाता है। जो श्रद्धालु पूरे साल इस पल का इंतजार करते हैं, वे अब उज्जैन पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार अष्टमी तिथि बढ़ने के कारण उत्सव 10 दिनों तक चलेगा, जिससे भक्तों को दर्शन का ज्यादा अवसर मिलेगा।
उज्जैन शिव नवरात्र उत्सव की शुरुआत
शुक्रवार सुबह से महाकाल मंदिर में शिव नवरात्र उत्सव का विधिवत आरंभ हुआ। सबसे पहले श्री कोटेश्वर महादेव की पूजा की गई, जिसके बाद गर्भगृह में बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना हुई। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखी जा रही है।
पूजा के दौरान भगवान महाकाल को केसर और चंदन अर्पित किया गया, जबकि माता पार्वती को हल्दी चढ़ाई गई। दिनभर अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ किया जा रहा है, जो इस उत्सव की खास परंपरा का हिस्सा है।
दोपहर में भोग आरती होगी और शाम को संध्या आरती के दौरान भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद नारदीय संकीर्तन और हरिकथा से वातावरण भक्तिमय बना रहेगा।
क्यों खास होता है महाकाल का दूल्हा स्वरूप?
शिव नवरात्र के दौरान बाबा महाकाल को दूल्हा रूप में सजाया जाता है। इस स्वरूप में भगवान के दर्शन को बहुत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस समय दर्शन करने से विवाह, परिवार और जीवन से जुड़ी कई बाधाएं दूर होती हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह परंपरा सदियों पुरानी है और उज्जैन की पहचान बन चुकी है। कई भक्त खास तौर पर इसी स्वरूप के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। शहर के होटल, धर्मशालाएं और बाजार भी इन दिनों श्रद्धालुओं से भरे रहते हैं। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, इस समय शहर की अर्थव्यवस्था भी तेज हो जाती है।
शिव नवरात्र के दौरान बदले आरती और पूजा के समय
भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने पूजा और आरती के समय में बदलाव किया है। आम दिनों में सुबह 10:30 बजे होने वाली भोग आरती अब दोपहर 1 बजे होगी। इसी तरह शाम की संध्या पूजा, जो पहले 5 बजे होती थी, अब दोपहर 3 बजे की जाएगी। इससे बाहर से आने वाले भक्तों को दर्शन के लिए बेहतर समय मिल सकेगा। महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में विशेष व्यवस्था रहेगी। 14 फरवरी की रात 2:30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात 11 बजे तक लगातार दर्शन होंगे। यानी लगभग 44 घंटे तक मंदिर खुला रहेगा।
इन दिव्य रूपों में भक्तों को दर्शन देंगे बाबा महाकाल
6 फरवरी – चंदन श्रृंगार
7 फरवरी – दिव्य श्रृंगार
8 फरवरी – शेषनाग श्रृंगार
9 फरवरी – घटाटोप श्रृंगार
10 फरवरी – छबीना श्रृंगार
11 फरवरी – होलकर श्रृंगार
12 फरवरी – मनमहेश श्रृंगार
13 फरवरी – उमा महेश श्रृंगार
14 फरवरी – शिवतांडव श्रृंगार
15 फरवरी – महाशिवरात्रि पर सप्तधान श्रृंगार
श्रद्धालुओं के लिए क्या जरूरी बातें जानना आवश्यक है?
अगर आप भी इन दिनों महाकाल मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। भीड़ को देखते हुए सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए हैं। शहर में पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था भी बदली गई है। ऑनलाइन दर्शन पास की सुविधा का उपयोग करने से लंबी कतार से बचा जा सकता है। साथ ही, मंदिर परिसर में अनुशासन और नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
उज्जैन की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर पड़ता है बड़ा असर
शिव नवरात्र और महाशिवरात्रि के दौरान उज्जैन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार और पर्यटन पर पड़ता है। होटल, ऑटो, टैक्सी, फूल-माला विक्रेता, प्रसाद दुकानदार सभी के काम में तेजी आ जाती है। स्थानीय लोगों के लिए यह समय रोजगार और कमाई का बड़ा अवसर बनता है। उज्जैन प्रशासन भी शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करता है।





