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उज्जैन का रहस्यमयी चक्रतीर्थ श्मशान, जहां मृत्यु को भी माना जाता है मुक्ति का रास्ता

Written by:Bhawna Choubey
Published:
उज्जैन का चक्रतीर्थ श्मशान घाट सिर्फ अंतिम संस्कार स्थल नहीं, बल्कि मोक्ष और तंत्र साधना का पवित्र तीर्थ माना जाता है, जहां देश-विदेश से साधक पहुंचते हैं और आस्था, रहस्य व अध्यात्म का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
उज्जैन का रहस्यमयी चक्रतीर्थ श्मशान, जहां मृत्यु को भी माना जाता है मुक्ति का रास्ता

उज्जैन को केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत केंद्र माना जाता है। यहां हर गली, हर मंदिर और हर घाट शिव की उपस्थिति का एहसास कराता है। इसी पवित्र नगरी में एक ऐसा स्थान भी है, जहां जीवन का अंतिम पड़ाव भी मुक्ति का मार्ग माना जाता है।

शिप्रा नदी के तट पर स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट को साधारण श्मशान नहीं बल्कि एक पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहां अंतिम संस्कार को आत्मा की परम यात्रा की शुरुआत समझा जाता है। यही कारण है कि यह घाट श्रद्धालुओं और साधकों दोनों के लिए विशेष महत्व रखता है।

जहां हर कण में बसती है सनातन आस्था

उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका कहा जाता था, सनातन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण नगरी में से एक रही है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की वजह से यह विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इस शहर का आध्यात्मिक विस्तार केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है।

यहां का वातावरण साधना, तपस्या और मोक्ष की परंपरा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यहां समय भी महाकाल के नियंत्रण में चलता है और मृत्यु को भी अंत नहीं बल्कि मुक्ति का मार्ग माना जाता है। इसी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में चक्रतीर्थ श्मशान घाट की महत्ता और बढ़ जाती है।

क्यों मिला चक्रतीर्थ श्मशान को तीर्थ का दर्जा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर किए गए अंतिम संस्कार से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस स्थान को तीर्थ के रूप में सम्मान मिला है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद अनेक वीर योद्धाओं का अंतिम संस्कार करने के लिए एक पूर्ण पवित्र भूमि की खोज की गई। लेकिन ऐसी जगह मिलना कठिन था, जहां पाप का प्रभाव न रहा हो।

पौराणिक कथा के अनुसार, अवंतिका नगरी यानी आज के उज्जैन में ऐसी दिव्य भूमि मिली। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से कर्ण के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कराया। इसी प्रसंग से इस स्थान का नाम चक्रतीर्थ पड़ा। तब से यह स्थल केवल श्मशान नहीं बल्कि मोक्ष भूमि के रूप में प्रतिष्ठित हो गया।

तंत्र साधकों का प्रमुख साधना स्थल

चक्रतीर्थ श्मशान घाट केवल अंतिम संस्कार स्थल ही नहीं बल्कि तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। कई साधक मानते हैं कि यहां की ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली है और साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। विशेषकर दिवाली की अमावस्या पर यहां देश-विदेश से तांत्रिक और साधक पहुंचते हैं। इस दौरान रात भर विशेष साधनाएं होती हैं और सिद्धि प्राप्ति के प्रयास किए जाते हैं। श्मशान साधना को तंत्र परंपरा में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, और उज्जैन का चक्रतीर्थ इस परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।

मोक्ष की आस्था और श्रद्धालुओं का विश्वास

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि चक्रतीर्थ में अंतिम संस्कार होने से आत्मा को मोक्ष का मार्ग मिलता है। इसी कारण कई परिवार दूर-दूर से यहां अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कराने आते हैं। यहां का वातावरण गंभीर जरूर है, लेकिन कई लोग इसे आत्मा की शांति का स्थान भी मानते हैं। जीवन और मृत्यु के इस संगम को समझने के लिए भी लोग यहां आते हैं।

त्रिवेणी घाट

उज्जैन में चक्रतीर्थ के अलावा त्रिवेणी क्षेत्र का श्मशान घाट भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नवग्रह मंदिर के पास स्थित है और शिप्रा, गंडकी तथा सरस्वती की धाराओं के संगम के कारण इसे त्रिवेणी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संगम स्थल पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए स्थानीय लोग यहां भी अंतिम संस्कार कराते हैं।