हिमाचल प्रदेश एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग की एक विस्तृत प्रेजेंटेशन ने इस संकट की भयावह तस्वीर पेश की। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर यह अनुदान बहाल नहीं हुआ तो सरकार के लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और एरियर का भुगतान करना लगभग असंभव हो जाएगा।
इस गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के हितों के खिलाफ एक शर्मनाक कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल के अस्तित्व की है।
भविष्य में क्या होंगे बड़े संकट?
वित्त विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, RDG की समाप्ति से राज्य पर कई गंभीर प्रभाव पड़ेंगे।
- वेतन और भत्तों पर संकट: सरकार पर पहले से ही पिछले वेतन आयोग का करीब 8,500 करोड़ रुपये का एरियर और डीए/डीआर का लगभग 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अनुदान के बिना इन भुगतानों को करना मुश्किल होगा।
- नई भर्तियों पर रोक: आर्थिक तंगी के चलते नई सरकारी नौकरियों पर पूरी तरह से रोक लग सकती है। साथ ही, दो साल से अधिक समय से खाली पड़े पदों को खत्म करने जैसे कड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं।
- संस्थानों का निजीकरण: घाटे में चल रहे सरकारी बोर्ड, निगमों और परियोजनाओं को निजी हाथों में सौंपने की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर भी विचार करना पड़ सकता है।
विपक्ष के रवैये से नाराज CM सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा हिमाचल के भविष्य से जुड़ा है और ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखानी चाहिए थी।
“यह किसी एक सरकार का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के हितों से जुड़ा मुद्दा है। यदि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त कर दिया गया तो राज्य की जनता के अधिकारों को सुरक्षित रखना बेहद कठिन हो जाएगा। प्रदेश हित के इतने बड़े मुद्दे पर उनका (भाजपा विधायकों का) न आना शर्मनाक है।” — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
सीएम ने कहा कि वह एक योद्धा हैं और प्रदेश के हकों के लिए हर चुनौती का सामना करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी और सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य को पूरा करने के लिए संसाधन जुटाने का हर संभव प्रयास कर रही है।
राजस्व बढ़ाने के प्रयास भी नाकाफी
वित्त विभाग ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के लिए राजस्व बढ़ाने की सीमाएं काफी कम हो गई हैं। इसके बावजूद सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। विभिन्न उपकर लगाकर लगभग 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय जुटाई गई है। इसके अलावा गैर-कृषि उपयोग वाली भूमि पर नया राजस्व नियम लागू किया गया है और सरकारी संपत्तियों के मौद्रिकरण पर भी काम हो रहा है। हालांकि, राज्य के मुख्य आय स्रोत नदियों, वन संपदा और पर्यटन तक ही सीमित हैं, जो मौजूदा खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। राज्य सरकार ने अपने स्तर पर 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है।





