अलनीनो के संभावित प्रभाव से इस साल मैसम विभाग ने कम वर्षा की आशंका जताई है, मध्य प्रदेश में ऐसे हालात अभी से दिखाई देने लगे हैं, प्रदेश के क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ जुलाई में सामने से कम वर्षा दर्ज की गई है, खेत सूखे पड़े हैं जिसने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है, कांग्रेस ने किसानों की परेशानी पर सरकार पर निशाना साधा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया में आई ख़बरों के आधार पर प्रदेश की भाजपा सरकार को निशाना बनाया है, रिपोर्ट्स के मताबिक प्रदेश के कई इलाके इअसे हैं जहाँ फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं कांग्रेस ने ऐसे क्षेत्रों में किसानों के लिए कोई वैकल्पिक नहीं किये जाने पर नाराजगी जताई है।
अल्प वर्षा ने बढ़िया किसानों की परेशानी, फसलें सूख रहीं
सिंधार ने X पर लिखा- मध्य प्रदेश में मानसून पर लगे ब्रेक ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 55 में से 28 जिलों में सामान्य से 16% से लेकर 78% तक कम बारिश हुई है। अलीराजपुर (-78%), रीवा (-61%), मैहर (-48%) और नर्मदापुरम (-46%) जैसे जिलों में खेत दरक रहे हैं और फसलें सूखने की कगार पर हैं।
नहरें सूखी ट्यूबवेल के सहारे फसल बचाने को मजबूर है किसान
उन्होंने कहा- विपक्ष ने सरकार को पहले ही चेताया था कि मानसून की बेरुखी और देरी से निपटने के लिए पहले से पुख्ता बैकअप व्यवस्थाएं (सिंचाई, बिजली और नहरों में पानी) की जाएं, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। नतीजतन आज नहरें सूखी हैं और किसान ट्यूबवेल के सहारे अपनी मेहनत बचाने को मजबूर हैं।
कांग्रेस का आरोप, सरकार को किसानों की बदहाली से कोई सरोकार नहीं
सिंघार ने कहा- दुखद यह है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के किसानों के खेतों की इस बदहाली से कोई सरोकार नहीं है, मुख्यमंत्री जी अपनी इस उदासीनता को छोड़िए, किसान संकट में है, तत्काल प्रभावित जिलों का सर्वे करवाकर किसानों को राहत पैकेज देने और वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था करने के निर्देश जारी कीजिए।






