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MP में पेंशन फाइल रोकना पड़ेगा भारी, हर स्तर पर डेडलाइन तय; देरी हुई तो तय होगी जवाबदेही

Written by:Shyam Dwivedi
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मध्य प्रदेश में रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन फाइलों को लेकर वित्त विभाग ने हर स्तर के लिए तय किया अधिकतम समय, सामान्य पेंशन केस 15 दिन, पहले से तय पेंशन में बदलाव के मामले 10 दिन और वेतन निर्धारण की प्रक्रिया 11 कार्य दिवस में करनी होगी पूरी; देरी होने पर संबंधित स्तर की तय होगी जिम्मेदारी

भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी सेवा से रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन फाइल अब किसी अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर लंबे समय तक अटकी नहीं रह सकेगी। वित्त विभाग ने ऑनलाइन पेंशन मामलों को निपटाने के लिए हर स्तर पर अधिकतम समय तय कर दिया है। निर्धारित समय में फाइल आगे नहीं बढ़ी तो संबंधित स्तर की जवाबदेही तय होगी और आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

नई व्यवस्था राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) के तहत लागू की गई है। नए पेंशन मामले को तीन स्तरों क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर से गुजरना होता है। अब प्रत्येक स्तर को अपना काम पूरा करने के लिए अधिकतम पांच-पांच कार्य दिवस मिलेंगे। यानी सामान्य पेंशन प्रकरण की पूरी प्रक्रिया के लिए कुल 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय कर दी गई है।

पहले से तय पेंशन में बदलाव (रिवाइज्ड पेंशन) के मामले 10 दिन में निपटेंगे

जिन रिटायर्ड कर्मचारियों की पहले से तय पेंशन की राशि में किसी कारण से संशोधन या दोबारा गणना की जानी है, ऐसे रिवाइज्ड पेंशन मामलों को और जल्दी निपटाना होगा। इसके लिए क्रियेटर को अधिकतम चार कार्य दिवस मिलेंगे, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन कार्य दिवस में अपनी कार्रवाई पूरी करनी होगी। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकतम 10 कार्य दिवस तय किए गए हैं।

वेतन निर्धारण की फाइल के लिए 11 दिन

वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के लिए भी समय तय कर दिया गया है। इसमें क्रियेटर को पांच कार्य दिवस और वेरीफायर तथा एप्रूवर को तीन-तीन कार्य दिवस मिलेंगे। यानी पूरी प्रक्रिया अधिकतम 11 कार्य दिवस में पूरी करनी होगी।

समीक्षा में सामने आईं लंबे समय से अटकी फाइलें

वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि अलग-अलग संभागीय और जिला कार्यालयों में पेंशन से जुड़े कई मामले जरूरत से ज्यादा समय से लंबित हैं। कुछ फाइलें क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर स्तर पर लंबे समय से आगे नहीं बढ़ी थीं।

इसके बाद विभाग ने हर स्तर के लिए अधिकतम समय तय कर दिया। इससे न सिर्फ पेंशन मिलने में होने वाली बेवजह देरी पर रोक लगाने की कोशिश होगी, बल्कि यह भी साफ हो सकेगा कि किसी कर्मचारी की फाइल किस स्तर पर और कितने समय से रुकी हुई है। तय समय में काम नहीं होने पर उसी के अनुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी।

रिटायरमेंट के बाद शुरू नहीं होगी पेंशन की तैयारी

नई व्यवस्था में ऐसे कर्मचारियों के मामलों पर भी जोर दिया गया है, जिनका रिटायरमेंट आने वाले महीनों में होना है। उनके पेंशन संबंधी मामलों में जरूरी स्वीकृति की प्रक्रिया पहले से तय समय में पूरी करनी होगी, ताकि रिटायरमेंट के बाद पेंशन शुरू होने में अनावश्यक देरी न हो। यानी कर्मचारी के रिटायर होने के बाद उसकी फाइल तैयार करने की कवायद शुरू करने के बजाय जरूरी प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ानी होगी।

जून 2025 में बना था केंद्रीकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल

सरकारी कर्मचारियों के पेंशन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए वित्त विभाग ने 9 जून 2025 को राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) बनाया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से पुरानी व्यवस्था खत्म कर ऑनलाइन पेंशन मामलों का निपटारा SCPPC के जरिए किया जा रहा है। इस सेल के जरिए नई पेंशन स्वीकृत करने के साथ पहले से तय पेंशन में बदलाव और वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों पर भी कार्रवाई की जाती है।

अब नई समय-सीमा तय होने से पेंशन फाइल को लंबे समय तक एक ही स्तर पर रोके रखना मुश्किल होगा। खास बात यह है कि हर चरण के लिए दिन तय होने से देरी होने पर यह भी पता लगाया जा सकेगा कि फाइल कहां अटकी और इसके लिए जवाबदेही किसकी बनती है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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