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MP में नैक की तर्ज पर बनेगा सैक: उच्च शिक्षा विभाग की बैठक में सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए ये बड़ निर्देश

Written by:Shruty Kushwaha
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समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने, नए महाविद्यालय खोलने, आवश्यकता अनुसार सुबह-शाम की शिफ्ट में कॉलेज संचालित करने सहित कई अहम निर्देश दिए। बैठक में कृषि शिक्षा, शोध गतिविधियों, डिजिटल शिक्षा, एआई पाठ्यक्रमों और उच्च शिक्षण संस्थानों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई।

मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार नए कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद’ (NAAC) की तर्ज पर राज्य स्तर पर ‘स्टेट असेसमेंट काउंसिल’ (SAC) गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभाग विद्यार्थियों के लिए नए कार्यक्रमों और नवाचारों की तैयारी करें। उन्होंने रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने दिए ये निर्देश

उच्च शिक्षा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च शिक्षा संस्थानों को अधिक रोजगारोन्मुख और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन पर विशेष जोर दिया जाए, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ बेहतर रोजगार अवसर भी मिल सकें।

उन्होंने आवश्यकता के अनुसार पार्ट-टाइम महाविद्यालय संचालित करने और सुबह शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए। साथ ही, जहां जरूरत हो वहां सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का उपयोग महाविद्यालय संचालन के लिए किए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया, जिससे वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप विषय एवं करियर का चयन कर सकें। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर, कृषि विज्ञान सहित अन्य व्यावसायिक (वोकेशनल) विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

कई नए पाठ्यक्रम प्रारंभ

सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों के विस्तार और लोकप्रियता को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा से 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे युवाओं को आधुनिक कृषि और उससे जुड़े रोजगार अवसरों की दिशा में प्रेरणा मिलेगी।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन प्रबंधन (बीबीए) पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं, जबकि प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हो रहे हैं। पिछले वर्ष 83 नए शोध केंद्र शुरू किए गए और आने वाले समय में 100 अतिरिक्त शोध केंद्र स्थापित करने की योजना है। राज्य ने सकल नामांकन अनुपात (GER) में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि 1.1 प्रतिशत रही, वहीं मध्यप्रदेश ने 1.8 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है। राष्ट्रीय रैंकिंग में भी प्रदेश की संस्थाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में नए कोर्स की तैयारी

मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा स्थित राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान जैसे रोजगारोन्मुख विषयों को शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं, जिसके लिए राज्य सरकार आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग और लचीली शिक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कक्षा 12वीं के बाद विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही पार्ट-टाइम कॉलेजों और दोहरी शिफ्ट व्यवस्था पर भी काम किया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके। आवश्यकता पड़ने पर सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का उपयोग भी महाविद्यालय संचालन के लिए किया जा सकेगा।

तकनीक और नवाचार में आगे बढ़ रहा विभाग

बैठक में विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि ‘स्वयं’ पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी रहा है। राज्य के 618 उच्च शिक्षण संस्थान ‘वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन’ पोर्टल से जुड़ चुके हैं, जिसका लाभ 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उठा चुके हैं। प्रदेश के 10 संभागीय मुख्यालयों पर डिजिटल स्टूडियो स्थापित किए गए हैं और ‘ई-ज्ञान सेतु’ चैनल के माध्यम से ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें हिंदी के साथ बुंदेली, बघेली और मालवी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी पठन पाठन सामग्री शामिल की गई है।

एआई, एनीमेशन और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

उच्च शिक्षा विभाग आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दे रहा है। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। वहीं आठ महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स लैब स्थापित की जा रही हैं। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विभाग ने व्यापक पहल की है। पांच हजार से अधिक फैकल्टी और स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि ‘मनोबल’ सत्रों में 71 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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