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MP में तीन साल बाद भी अधूरे सांदीपनि विद्यालय! उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल, समयबद्ध पूर्णता और पारदर्शी जांच की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भारी बजट स्वीकृत होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर छात्र अब भी अस्थायी या पुराने भवनों में पढ़ाई कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ खोखले दावे कर रही है लेकिन प्रदेश में शिक्षा की स्थिति बहुत निराशाजनक है।
MP में तीन साल बाद भी अधूरे सांदीपनि विद्यालय! उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल, समयबद्ध पूर्णता और पारदर्शी जांच की मांग

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में संचालित “सांदीपनि विद्यालय” योजना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा  कि तीन साल पहले स्वीकृत 274 स्कूलों में से अब तक सिर्फ 161 का ही निर्माण पूरा हो पाया है। योजना के तहत स्वीकृत कई भवन अब भी अधूरे पड़े हैं और बच्चे जर्जर या अस्थायी स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है।

नेता प्रतिपक्ष ने इस योजना में देरी को लेकर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। इसी के साथ उन्होंने समयबद्ध पूर्णता और पारदर्शी जांच की भी मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है और तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत निराशाजनक है।

सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण कार्य अधूरा

मध्यप्रदेश में सांदीपनि विद्यालय (पूर्व में सीएम राइज) परियोजना की रफ्तार तीन साल बाद भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। आंकड़ों के अनुसार, 275 स्वीकृत स्कूलों में से सिर्फ 97 ही नए भवनों में शिफ्ट हो पाए हैं। हालांकि 161 स्कूलों के भवन निर्माण कार्य को पूर्ण बताया जा रहा है लेकिन 64 स्कूल ऐसे हैं जिनका लोकार्पण अब भी बाकी है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में लगभग 9,000 सरकारी स्कूलों को सीएम राइज मॉडल में परिवर्तित करना है। साल 2022 में जब इस योजना की घोषणा हुई थी तब डेढ़ वर्ष में भवन निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पहले चरण में 274 स्कूलों को चिन्हित किया गया था जिनमें राजधानी के आठ विद्यालय भी शामिल हैं। लेकिन तीन साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद कई स्कूल भवन अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं हो सके हैं।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा 

इसे लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। उमंग सिंघार ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आरोप लगाया है कि योजना की घोषणा को तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई स्कूल भवन अधूरे पड़े हैं और विद्यार्थी अब भी अस्थायी या जर्जर भवनों में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पहले चरण में स्वीकृत 274 स्कूलों में से बड़ी संख्या अभी भी पूरी तरह  संचालन में नहीं आ पाई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना ही समय पर तैयार नहीं हो पा रही, तब निजी स्कूलों को टक्कर देने के दावे सिर्फ नारेबाज़ी प्रतीत होते हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। इसी के साथ उन्होंने समयबद्ध कार्य पूर्ण करने और पारदर्शी जांच की भी मांग की है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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